सृष्टि की रचनाकार के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, मालपुआ और हलवे का लग रहा भोग
Maa Kushmanda Puja: शारदीय नवरात्र का आज चौथा दिन है। आज 14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा की आराधना हो रही। मंदिरों और पूजा पंडालों में भारी भीड़ है। श्रद्धालु सुबह से ही कतारों में खड़े हैं। मां कूष्मांडा सृष्टि की आदि स्वरूपा मानी जाती हैं। इनकी मंद मुस्कान से ही ब्रह्मांड की रचना हुई। भक्त सुख और समृद्धि की मंगल कामना कर रहे। मां की कृपा से रोग और शोक मिटते हैं। चारों तरफ भक्ति और उल्लास का माहौल है।
Maa Kushmanda Puja: आठ भुजाओं में दिव्य अस्त्र-शस्त्र सुशोभित
मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता। देवी की आठ भुजाओं में दिव्य शक्तियां विराजमान हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष और बाण सजते हैं। साथ ही कमल का फूल और अमृत कलश है। देवी जपमाला, चक्र और गदा भी धारण करती हैं। मां का भव्य वाहन बलशाली सिंह है। उनका तेज सूर्य के समान प्रकाशमान माना जाता है। देवी का दिव्य निवास सूर्य मंडल के भीतर है। उनके अलौकिक रूप के दर्शन कर भक्त निहाल हैं।
मालपुआ और हलवे का लगाया जा रहा प्रिय भोग
आज श्रद्धालु देवी को उनका प्रिय भोग चढ़ा रहे। मां कूष्मांडा को मालपुआ अत्यंत प्रिय माना जाता। भक्त शुद्ध घी में बने स्वादिष्ट मालपुए ला रहे। साथ ही पीले रंग की मिठाइयां भी चढ़ा रहे हैं। कई श्रद्धालु सिंघाड़े के आटे का हलवा बना रहे। नारियल, फल और बताशे भी अर्पित किए जा रहे। भोग लगाते समय पूरी पवित्रता का ध्यान रख रहे। इससे घर में सुख और शांति का वास होता है। देवी अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाती हैं।
Maa Kushmanda Puja: मंद मुस्कान से रची थी इस पूरी सृष्टि की काया
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवी आदि शक्ति हैं। जब चारों तरफ केवल घना अंधकार छाया हुआ था। तब मां कूष्मांडा ने मंद मुस्कान बिखेरी थी। उसी मुस्कान से संपूर्ण ब्रह्मांड का जन्म हुआ। संसार में प्रकाश और जीवन का संचार हुआ। इसलिए इन्हें सृष्टि की पहली रचनाकार कहते हैं। उनके तेज की बराबरी कोई देवता नहीं कर सकते। सूर्य देव भी इन्हीं के तेज से प्रकाशित होते हैं। मां की साधना से जीवन का अंधकार मिट जाता है।
अच्छे स्वास्थ्य, आयु और यश की होती है प्राप्ति
मां कूष्मांडा की पूजा से निरोगी काया मिलती है। भक्त उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु मांग रहे। देवी की उपासना से समस्त व्याधियां दूर भागती हैं। जीवन में साहस, पराक्रम और यश की वृद्धि होती। व्यक्ति के आत्मविश्वास में अद्भुत बढ़ोतरी देखने को मिलती। आज साधक अनाहत चक्र में ध्यान लगा रहे हैं। मंत्रों के सस्वर पाठ से वातावरण गूंज रहा। देवी के जयकारों से पूरा पंडाल भक्तिमय बना है।
धूप, दीप और शंख ध्वनि से गूंज रहे पूजा पंडाल
सुबह से ही मंदिरों में विशेष आरती हो रही। शंख और घंटों की गूंज से माहौल पावन है। सुगंधित धूप और कपूर की महक फैली हुई है। महिलाएं मां को लाल चुनरी और सिंदूर चढ़ा रहीं। श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का पाठ एकाग्रचित्त होकर कर रहे। व्रतधारी भक्त श्रद्धापूर्वक फलाहार ग्रहण कर रहे हैं। शाम को भव्य महाआरती की विशेष तैयारी चल रही। भक्त मां के चरणों में शीश नवा रहे हैं। हर कोई देवी से सुखद जीवन का वरदान मांग रहा।
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