रजरप्पा मंदिर पुनरुद्धार की समय सीमा तय नहीं, 20 नवंबर तक मांगा नया शपथ पत्र
Rajrappa Temple Restoration: झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को एक अहम सुनवाई हुई। रजरप्पा मंदिर मामले पर अदालत सख्त दिखी। मां छिन्नमस्तिका मंदिर के पुनरुद्धार पर चर्चा हुई। संजीव कुमार सिंह की अवमानना याचिका पर बहस हुई। पर्यटन विभाग के सचिव ने शपथ पत्र दिया। उन्होंने 102 करोड़ की डीपीआर की बात कही। लेकिन अदालत जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई। हाईकोर्ट ने पूछा, काम कब तक पूरा होगा। कोर्ट ने तय समय सीमा की मांग की।
Rajrappa Temple Restoration: कैबिनेट और वित्त विभाग से मंजूरी बाकी
पर्यटन सचिव ने अदालत को पूरी प्रक्रिया बताई। उन्होंने कहा कि 102 करोड़ की योजना बनी है। डीपीआर अभी विभागीय मंत्री के पास भेजी गई है। वहां से प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जाएगा। वित्त विभाग की सहमति के बाद कैबिनेट में जाएगा। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने पर स्वीकृति जारी होगी। इसके बाद ही निर्माण कार्य धरातल पर उतरेगा। कोर्ट ने इस लंबी प्रक्रिया पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा, इसमें कोई निश्चित समय नहीं दिया।
Rajrappa Temple Restoration: 20 नवंबर तक दाखिल करना होगा शपथ पत्र
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा। पर्यटन सचिव को 20 नवंबर तक का समय मिला। अगली सुनवाई में विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करना होगा। अदालत के आदेश पर कई अधिकारी ऑनलाइन जुड़े। रामगढ़ डीसी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। पर्यटन विभाग के सचिव भी वीसी से जुड़े रहे। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने बहस की। उन्होंने पूर्व आदेशों का अनुपालन कराने की मांग रखी।
भैरवी नदी तट पर मौतों को लेकर जताई चिंता
हाईकोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की। मंदिर के पास भैरवी नदी का तेज बहाव है। सुरक्षा घेरा न होने से कई हादसे हुए हैं। नदी तट पर डूबने से कई श्रद्धालुओं की मौत हुई। ऐसे में हाईकोर्ट के पुराने आदेश का पालन जरूरी है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को टाला नहीं जा सकता। वहां पुख्ता सुरक्षा इंतजाम तत्काल किए जाने चाहिए। पर्यटकों को बेहतर और सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। हर साल लाखों भक्त पूजा करने पहुंचते हैं।
11 अगस्त 2023 के आदेश में दिए थे 10 निर्देश
हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2023 को निर्देश दिए थे। जनहित याचिका पर कोर्ट ने 10 बिंदु तय किए थे। राज्य सरकार और पर्यटन विभाग को आदेश मिला था। झारखंड पर्यटन विकास निगम और रामगढ़ प्रशासन जिम्मेदार थे। मंदिर परिसर का भव्य सौंदर्यीकरण कराने का आदेश था। नदी तट पर स्थायी स्नान घाट बनाने को कहा था। महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के कक्ष बनने थे। साफ-सुथरे शौचालयों और पेयजल की व्यवस्था करनी थी।
अतिक्रमण हटाने और नदी चौड़ीकरण पर जोर
कोर्ट ने परिसर को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया। भैरवी नदी के चौड़ीकरण का काम पूरा होना था। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्पताल की मांग थी। रात के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था जरूरी बताई गई। संजीव कुमार सिंह ने अवमानना याचिका दाखिल की थी। उन्होंने कहा कि आदेशों पर अमल नहीं हो रहा। विकास कार्य केवल फाइलों तक ही सीमित रह गए। अब अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए जवाब तलब किया।
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