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HIGH COURT: झारखंड हाईकोर्ट में गुमला की लापता बच्ची मामले पर सुनवाई, कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

वर्ष 2018 से लापता छह वर्षीय बच्ची का मामला, मां ने दाखिल की है हेबीस कॉर्पस याचिका

झारखंड हाईकोर्ट में गुमला जिले से साल 2018 से लापता एक छह वर्षीय बच्ची के मामले को लेकर सुनवाई हुई। यह पूरा मामला अदालत में लंबे समय से चल रहा है। लापता बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन ने अपनी बेटी को सकुशल बरामद करने की गुहार लगाते हुए हाईकोर्ट में हेबीस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि पुलिस जांच में किसी प्रकार की कोताही न बरती गई हो और बच्ची का सुराग जल्द से जल्द मिल सके।

HIGH COURT: मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा का गुजरात में हुआ सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट, जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें

मामلات की सुनवाई के दौरान अदालत में मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा से जुड़ी जांच रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा का गुजरात के गांधीनगर में सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट कराया गया था। इस विशेष टेस्ट में वह संदिग्ध पाई गई है। इससे पहले की सुनवाई में राज्य सरकार की तरफ से अदालत को यह जानकारी दी गई थी कि स्वास्थ्य कारणों के चलते मुख्य आरोपी का नार्को टेस्ट मुमकिन नहीं हो पाया था। नार्को टेस्ट न होने के बाद गांधीनगर में उसका सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट और अन्य पूरक टेस्ट किए गए थे, जिसके नतीजों को लेकर अब कोर्ट में मंथन चल रहा है।

HIGH COURT:प्रार्थी पक्ष ने पुलिस अनुसंधान पर उठाए गंभीर सवाल, तत्कालीन एसपी और अनुसंधानकर्ताओं को क्लीन चिट मिलने पर ऐतराज

सुनवाई के दौरान प्रार्थी की तरफ से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता शशांक शेखर ने सरकार के शपथ पत्र पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार की ओर से दाखिल किए गए शपथ पत्र में वर्ष 2018 से 2022 के बीच गुमला में तैनात रहे तत्कालीन एसपी और संबंधित अनुसंधानकर्ताओं को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी गई है। अधिवक्ता ने दलील दी कि जिस समय यह घटना घटी, उस शुरुआती दौर में पुलिस की तरफ से एफआईआर दर्ज करने में भारी देरी की गई थी। इसके अलावा इस मामले में पुलिस का अनुसंधान भी बेहद ढीला और लचर रहा है। प्रार्थी पक्ष का कहना है कि पुलिस ने अभी तक बच्ची की वर्तमान खोजबीन के वास्तविक प्रोग्रेस से भी पूरी तरह अवगत नहीं कराया है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख, सरकार से पूछा गया- क्या DLSA गुमला को भेजी गई थी पीरियडिकल रिपोर्ट?

मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार की ओर से दायर किए गए शपथ पत्र पर प्रार्थी के जवाब का लिखित प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से एक बेहद अहम सवाल भी पूछा है। अदालत ने जानना चाहा है कि जब लड़की लापता हुई थी, उस समयावधि में क्या पुलिस अनुसंधान की पीरियडिकल रिपोर्ट (अवधि रिपोर्ट) गुमला जिला विधिक सेवा प्राधिकार यानी डीएलएसए (DLSA) को भेजी गई थी या नहीं? इस मामले की अगली सुनवाई में इन तमाम बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

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