मां शैलपुत्री की आराधना के साथ नौ दिवसीय पर्व का आगाज
Sharad Navratri — शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ को हो गया। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हुए इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना का विधान है। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं। पर्व की शुरुआत के साथ ही धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई घरों में कलश स्थापना कर नौ दिनों की पूजा का संकल्प लिया गया है।
Sharad Navratri: कलश स्थापना के साथ शुरू हुई पूजा
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इसे घटस्थापना भी कहा जाता है। इसी अनुष्ठान के साथ देवी की पूजा शुरू की जाती है। श्रद्धालु पूजा स्थल की सफाई कर कलश स्थापित करते हैं। इसके बाद मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग का पालन किया जाता है। अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण पूजा के समय में अंतर हो सकता है।
मां शैलपुत्री को समर्पित है नवरात्रि का पहला दिन
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इसी कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। देवी के इस स्वरूप को शक्ति, स्थिरता और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा के दौरान श्रद्धालु फूल, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। भक्त परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं।
घरों और मंदिरों में होंगे धार्मिक अनुष्ठान
नवरात्रि के दौरान घरों और देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। सुबह और शाम आरती के साथ मंत्रों का जाप होता है। कई श्रद्धालु दुर्गा चालीसा का पाठ भी करते हैं। अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार भक्त व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिन उपवास करते हैं, जबकि अन्य अपनी सुविधा के अनुसार व्रत और पूजा करते हैं। मंदिरों में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु देवी का आशीर्वाद लेते हैं।
नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा
शारदीय नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी और तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। इसके बाद मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। प्रत्येक स्वरूप का अपना धार्मिक महत्व है। इन नौ दिनों में पूजा, मंत्र जाप और आरती के माध्यम से देवी के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।
व्रत और पूजा से जुड़ी हैं धार्मिक मान्यताएं
हिंदू धार्मिक परंपराओं में नवरात्रि को आत्मिक साधना और भक्ति का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इन दिनों मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है। दुर्गा चालीसा और अन्य धार्मिक पाठ भी कई घरों में पूजा का हिस्सा होते हैं। हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक आस्था के रूप में देखा जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और जरूरतों के अनुसार खानपान का ध्यान रखते हैं।
20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा समापन
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक चलेगी। इस अवधि में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के बाद विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। यह पर्व परंपरागत रूप से अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु पूजा-पाठ, आरती और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पर्व मनाते हैं। देवी आराधना के साथ शुरू हुआ यह उत्सव भक्तों के लिए आस्था और परंपरा से जुड़ने का अवसर है।


