संतान की दीर्घायु के लिए आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर कठिन साधना, जानें अष्टमी तिथि शुरू होने और पारण का समय
Jitiya Vrat 2026: संतान की लंबी उम्र का महापर्व जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) शुरू हो गया है। शुक्रवार को नहाय-खाय संपन्न हुआ। सप्तमी तिथि से तीन दिवसीय अनुष्ठान शुरू हो गया। माताओं ने स्नान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया। मुख्य निर्जला उपवास शनिवार 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। माताएं संतान के लिए निर्जला उपवास रखेंगी। पूरे 24 घंटे अन्न-जल का त्याग रहेगा।
Jitiya Vrat 2026: शनिवार सुबह 9:53 बजे से लगेगी अष्टमी, रविवार को नवमी में होगा पारण
ज्योतिषाचार्य पंडित एके पराशर ने शुभ मुहूर्त की जानकारी दी है। इस साल आश्विन कृष्ण अष्टमी शनिवार को है। यह तिथि 3 अक्टूबर सुबह 09:53 बजे लगेगी। अष्टमी तिथि रविवार सुबह 07:27 बजे समाप्त होगी। मुख्य व्रत शनिवार को ही रखा जाएगा। रविवार को व्रत का पारण होगा। सुबह 07:27 बजे के बाद नवमी में पारण किया जाएगा। शनिवार शाम को महिलाएं घाटों पर जुटेंगी। प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा होगी।
Jitiya Vrat 2026: भोर में ‘ओठगन’ और ‘सरगी’ की रस्म, सतपुतिया की सब्जी का विशेष भोग
जिउतिया व्रत में लोक परंपराओं का बड़ा महत्व है। व्रत से पहले भोर में ‘सरगी’ खाई जाती है। व्रत के लिए ‘ओठगन’ भी पकाया जाता है। एक मान्यता के अनुसार माताएं तारों की छांव में भोजन करती हैं। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। व्रत शुरू करने पूर्व ‘ओठगन’ और सतपुतिया की सब्जी का भोग लगाया जाता है। सतपुतिया यह तोरई फैमिली की ही एक विशेष सब्जी है। इसे ही भगवान को अर्पित किया जाता है।
जीतवाहन के आत्मत्याग से जुड़ी है पौराणिक कथा, गरुड़देव ने दिया था जीवनदान
इस व्रत का संबंध गंधर्वराज जीतवाहन से है। पौराणिक मान्यता के अनुसार जीतवाहन बड़े धर्मात्मा थे। उन्होंने नागवंश की रक्षा का बीड़ा उठाया। इसके लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी। उन्होंने स्वयं को पक्षीराज गरुड़देव को सौंप दिया। उनके इस त्याग से गरुड़देव प्रसन्न हुए। उन्होंने जीतवाहन को नया जीवनदान दिया। साथ ही नागों को जीवनदान मिला। तभी से यह व्रत शुरू हुआ। माताएं संतान की लंबी उम्र के लिए जीतवाहन को पूजती हैं।
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