मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु, दूध-खीर के भोग से हो रही देवी चंद्रघंटा की वंदना
Maa Chandraghanta Puja: शारदीय नवरात्र का आज तीसरा दिन है। 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा की पूजा हो रही है। मंदिरों और घरों में भक्ति का माहौल है। श्रद्धालु सुबह से ही दर्शन कर रहे हैं। वैदिक व धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा भक्तों के सारे कष्ट हरती हैं। इनके पूजन से सभी पाप नष्ट होते हैं। साधक को जीवन में शांति और साहस मिलता है। देवी का यह स्वरूप परम कल्याणकारी माना जाता है।
Maa Chandraghanta Puja: मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र
मां चंद्रघंटा का रूप अत्यंत दिव्य और मनमोहक है। देवी के मस्तक पर अर्धचंद्र सजता है। यह चंद्रमा घंटे के सुंदर आकार जैसा दिखता है। इसी वजह से इन्हें चंद्रघंटा नाम मिला है। देवी अपने वाहन सिंह पर सवार रहती हैं। उनके दस हाथों में दिव्य अस्त्र-शस्त्र सुसज्जित हैं। इनमें खड्ग, तलवार, ढाल और गदा शामिल हैं। साथ ही पाश, त्रिशूल और चक्र भी हैं। देवी धनुष और बाण से भरा तरकश रखती हैं। मां का यह स्वरूप वीरता का संदेश देता है। श्रद्धालु इस सौम्य रूप का ध्यान कर रहे हैं।
Maa Chandraghanta Puja: दूध और खीर का लग रहा विशेष भोग
आज श्रद्धालु माता को प्रिय भोग अर्पित कर रहे। मां चंद्रघंटा को दूध के पकवान बहुत भाते हैं। भक्त विशेष रूप से स्वादिष्ट खीर बना रहे हैं। इसमें केसर, इलायची और सूखे मेवे मिलाते हैं। भोग तैयार करते समय पवित्रता का पूरा ख्याल रखते हैं। दूध का भोग लगाने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। माता रानी भक्तों को आरोग्यता का आशीर्वाद देती हैं। घरों में शंख और घंटी बजाकर भोग लगा रहे हैं।
महिषासुर के आतंक से देवताओं को मिली थी मुक्ति
पौराणिक मान्यताओं में मां के पराक्रम की कथा आती है। प्राचीन काल में असुर महिषासुर का भारी आतंक था। उसने स्वर्ग लोक पर अपना कब्जा जमाने की ठानी। दानवों के अत्याचार से सभी देवता अत्यंत व्याकुल हुए। संकट से उबरने के लिए देवता त्रिदेवों के पास पहुंचे। ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने देवताओं की पुकार सुनी। सभी देवताओं के सम्मिलित तेज से दिव्य शक्ति प्रकट हुईं। यह परम शक्ति देवी दुर्गा के रूप में सामने आईं।
त्रिदेवों ने देवी को सौंपे थे अपने दिव्य अस्त्र
सभी देवताओं ने देवी को अपने अस्त्र-शस्त्र भेंट किए। भगवान शिव ने अपना त्रिशूल प्रदान किया। भगवान विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र अर्पित किया। देवराज इंद्र ने अपना विशेष दिव्य घंटा दिया। अन्य देवताओं ने भी अपनी शक्तियां देवी को सौंपीं। देवी ने गर्जना कर महिषासुर को ललकारा। दोनों के बीच कई दिनों तक भीषण युद्ध चला। अंत में देवी ने महिषासुर का वध कर दिया। इससे धर्म की रक्षा हुई और सत्य की जीत हुई।
भय से मुक्ति और साहस का मिलता है वरदान
मां चंद्रघंटा की उपासना से आंतरिक शक्ति जागृत होती है। देवी की कृपा से मन का डर दूर भागता है। व्यक्ति में कठिन परिस्थितियों से लड़ने का साहस आता है। जीवन की तमाम बाधाएं अपने आप समाप्त होने लगती हैं। साधक का मन एकाग्र और शांत होने लगता है। आज पंडालों में दुर्गा सप्तशती का पाठ गूंज रहा है। वातावरण में धूप, अगरबत्ती और कपूर की सुगंध फैली है। श्रद्धालु देवी के जयकारों से वातावरण गुंजायमान कर रहे हैं। चारों तरफ भक्ति और उल्लास का माहौल बना है।
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