- CSIR Foundation Day : सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (NML) में धूमधाम से मना 85वां CSIR स्थापना दिवस, मेधावी छात्र और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागी पुरस्कृत
CSIR Foundation Day : झारखंड के जमशेदपुर में बुधवार को एक भव्य वैज्ञानिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। बर्मामाइंस स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML) में 85वां सीएसआईआर स्थापना दिवस (CSIR Foundation Day) धूमधाम से मनाया गया। एनएमएल सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में कई दिग्गज शामिल हुए। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (Hindustan Copper Limited) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक अनुपम मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं, एनएमएल के पूर्व निदेशक डॉ. इंद्रनील चट्टोराज ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की। संस्थान के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधुरी और प्रशासन नियंत्रक जयशंकर शरण भी उपस्थित थे।
कार्यस्थल पर सुरक्षा और कर्मचारी कल्याण को बताया सबसे जरूरी
मुख्य अतिथि अनुपम मिश्रा ने सारगर्भित स्थापना दिवस व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस क्रम में उन्होंने ने कार्यस्थल पर सुरक्षा को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कर्मचारी कल्याण और जवाबदेही की संस्कृति को भी जरूरी माना। संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर उन्होंने विशेष बल दिया। नेतृत्व की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने एक अहम बात कही। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को वातानुकूलित कमरों में बैठकर नीतियां बनाते समय सतर्क रहना चाहिए। उन्हें उन कर्मचारियों के हितों का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए, जो अगले 20-25 वर्षों तक संस्था को अपनी सेवाएं देंगे।
CSIR Foundation Day: डॉ. शांति स्वरूप भटनागर के योगदान को किया गया याद
कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाकर की गई। इसके बाद सभागार में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गूंजा। एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधुरी ने सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज हम सीएसआईआर के 85 गौरवशाली वर्षों का जश्न मना रहे हैं। इस दौरान उन्होंने सीएसआईआर के संस्थापक महानिदेशक डॉ. शांति स्वरूप भटनागर को याद किया। डॉ. चौधुरी ने बताया कि डॉ. भटनागर की सोच बहुत स्पष्ट थी। उनका मानना था कि विज्ञान सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे सीधे तौर पर आम जनजीवन से जुड़ना चाहिए। राष्ट्र निर्माण में विज्ञान का अहम योगदान होना चाहिए।
CSIR Foundation Day: तकनीकी आत्मनिर्भरता पर डॉ. चट्टोराज का खास जोर
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. इंद्रनील चट्टोराज ने अपनी अहम बातें रखीं। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत 2047 के लक्ष्य पर पूरा फोकस किया। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को पाने में सीएसआईआर और एनएमएल की भूमिका बहुत बड़ी होगी। डॉ. चट्टोराज ने स्वदेशी वैज्ञानिक नवाचार को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने तकनीकी आत्मनिर्भरता को देश के लंबे विकास के लिए अहम माना। उन्होंने क्रिटिकल मिनरल्स और उन्नत पदार्थ के विकास पर काफी जोर दिया। इसके अलावा सतत विनिर्माण और पुनर्चक्रण जैसी तकनीकों को भी समय की मांग बताया। उन्होंने उद्योग जगत और अनुसंधान संस्थानों से मिलकर काम करने की अपील की।
मेधावी विद्यार्थियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं का हुआ सम्मान
इस खास मौके पर कर्मचारियों के बच्चों के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें निबंध, प्रश्नोत्तरी और चित्रकला प्रतियोगिता शामिल थी। मुख्य अतिथि ने सभी विजेताओं और उपविजेताओं को पुरस्कृत किया। इसके अलावा 12वीं की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का भी सम्मान हुआ। विज्ञान के न्यूनतम तीन विषयों में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाले विद्यार्थियों को चुना गया। इन मेधावी विद्यार्थियों को 6,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।
इन विद्यार्थियों में सोहम वर्मा, मान्या गुप्ता, तान्या सना रुंडा, आदर्श कुमार उपाध्याय और सिद्धांत दाश शामिल थे। खास बात यह रही कि तान्या सना रुंडा ने कंप्यूटर साइंस में पूरे 100 प्रतिशत अंक हासिल किए। समारोह में 25 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। वहीं, हाल ही में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों का भी सम्मान हुआ। अंत में प्रशासन नियंत्रक जयशंकर शरण ने सभी अतिथियों का आभार जताया और धन्यवाद ज्ञापन किया।
इसे भी पढ़ें : Heart Health: अरका जैन विवि के नर्सिंग स्कूल में विशेषज्ञ सत्र आयोजित


