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Jharkhand Migrants: मुंबई में बिरसा मुंडा की प्रतिमा में बदलाव का मुद्दा उठा

बोरीवली में प्रवासी संवाद कार्यक्रम, देवेंद्र नाथ महतो ने ऐतिहासिक स्वरूप के सम्मान की मांग की

Jharkhand Migrants: मुंबई के पश्चिमी बोरीवली स्थित वीर सावरकर उद्यान में शनिवार को झारखंडी प्रवासियों के बीच ‘प्रवासी संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। झारखंडवासी परिवर्तन संघ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रवासी श्रमिकों की रोजगार संबंधी चुनौतियों, प्रतिस्पर्धा और अन्य समस्याओं पर चर्चा हुई। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो भी इसमें शामिल हुए। उन्होंने महाराष्ट्र में स्थापित धरती आबा बिरसा मुंडा(Birsa Munda) की प्रतिमा में किए गए बदलावों पर आपत्ति जताई और उनके ऐतिहासिक स्वरूप का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की।

Jharkhand Migrants: बिरसा मुंडा की प्रतिमा के स्वरूप में बदलाव पर जताई आपत्ति

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को बिरसा मुंडा की प्रतिमा में किए गए अनावश्यक बदलावों को सुधारना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन और आदिवासी अस्मिता के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनकी पहचान पारंपरिक रूप से मशाल और तीर-धनुष जैसे प्रतीकों से भी जुड़ी रही है।

महतो ने कहा कि बिरसा मुंडा की ऐतिहासिक पहचान और पारंपरिक स्वरूप का सम्मान किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, प्रतिमा में किसी भी तरह का बदलाव करते समय उनके ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से इस विषय पर आवश्यक सुधार करने की मांग की। हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति में प्रतिमा के स्थान, बदलाव की प्रकृति और संबंधित सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं पर हुई चर्चा

प्रवासी संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य मुंबई में रहने वाले झारखंड के लोगों की समस्याओं और अनुभवों को साझा करना था। कार्यक्रम में रोजगार के अवसर, काम के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों पर बातचीत हुई। देवेंद्र नाथ महतो ने उपस्थित लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना।

महतो ने कहा कि झारखंड से हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद प्रवासी झारखंडियों के बीच एकता और आपसी भाईचारा कायम है। उन्होंने कहा कि प्रवासी समुदाय अपनी मेहनत, प्रतिभा और सांस्कृतिक पहचान के माध्यम से देश की आर्थिक गतिविधियों में योगदान दे रहा है। ऐसे कार्यक्रमों से लोगों को अपनी समस्याएं साझा करने और सामूहिक रूप से समाधान के रास्ते तलाशने का अवसर मिलता है।

झारखंडी संस्कृति को आगे बढ़ाने पर जोर

आयोजक झारखंडवासी परिवर्तन संघ के अध्यक्ष अरविंद आर्या ने कहा कि मुंबई महानगर में झारखंडी संस्कृति की मौजूदगी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि संघ की ओर से प्रत्येक वर्ष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य झारखंड की परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकजुटता को बनाए रखना है।

मुंबई जैसे महानगर में अलग-अलग राज्यों से आए लोग रहते हैं। ऐसे में अपनी मातृभूमि की भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना प्रवासी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों और विरासत से परिचित कराने का अवसर मिलता है।

‘दिशुम वीर बाबू’ की उपाधि से सम्मानित हुए देवेंद्र नाथ महतो

कार्यक्रम के दौरान आयोजक समिति ने देवेंद्र नाथ महतो को ‘दिशुम वीर बाबू’ की उपाधि से सम्मानित किया। समिति की ओर से उन्हें उनकी तस्वीर भी सप्रेम भेंट की गई। यह सम्मान कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा।

आयोजकों के अनुसार, इस तरह के आयोजन प्रवासी झारखंडियों को एक मंच पर लाने में मदद करते हैं। इनके माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श के साथ-साथ समुदाय के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग को भी बढ़ावा मिलता है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की रही मौजूदगी

प्रवासी संवाद कार्यक्रम में स्थानीय विधायक संजय उपाध्याय, पूर्व सांसद गोपाल सेठी, उमाशंकर मोदी, मनोज कुमार और सुधाकर पांडे सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रवासी झारखंडियों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा की गई।

बिरसा मुंडा की प्रतिमा के स्वरूप को लेकर देवेंद्र नाथ महतो की मांग भी कार्यक्रम के दौरान प्रमुखता से सामने आई। हालांकि, प्रतिमा में बदलाव को लेकर महाराष्ट्र सरकार का आधिकारिक पक्ष और प्रस्तावित सुधारों की स्थिति प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट नहीं की गई है। इस संबंध में संबंधित सरकारी विभाग की प्रतिक्रिया मिलने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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