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Bang Bandhu: बंग बंधु के प्रतिमा वंदन में भक्ति गीतों और नृत्य ने बांधा समां

बिष्टुपुर के मिलनी क्लब में दुर्गोत्सव पर सांस्कृतिक आयोजन, वृद्धाश्रम की 20 महिलाओं को दिए गए नए वस्त्र और जरूरी सामान

Bang Bandhu के प्रतिमा वंदन कार्यक्रम में रविवार को भक्ति और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। शारदीय दुर्गोत्सव के अवसर पर जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित मिलनी क्लब में सामाजिक संस्था बंग बंधु की ओर से यह आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मां दुर्गा की आराधना के साथ संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। आयोजन में सामाजिक सेवा को भी प्रमुखता दी गई। संस्था की ओर से वृद्धाश्रम में रहने वाली 20 महिलाओं के लिए नए वस्त्र, दैनिक उपयोग की सामग्री और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई।

Bang Bandhu के कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई

कार्यक्रम का शुभारंभ मां दुर्गा के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया गया। इस अवसर पर बंगाल क्लब के उपाध्यक्ष देवाशीष नाहा, महासचिव सोमो सेन, बंग बंधु की पैट्रन पूरबी घोष, अमित मैती, अध्यक्ष अपर्णा गुहा, महासचिव उत्तम गुहा और सेवाव्रती नील संघ क्लब के महासचिव उपस्थित रहे। सभी ने मां दुर्गा की आराधना की। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ।

मिलनी क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य दुर्गोत्सव की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को उत्सव के रूप में प्रस्तुत करना था। भक्ति गीतों और नृत्य के माध्यम से कलाकारों ने त्योहार के माहौल को जीवंत बनाया। उपस्थित लोगों ने भी प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

कलाकारों ने नृत्य से दिखाई दुर्गोत्सव की पारंपरिक छटा

सांस्कृतिक कार्यक्रम में अन्वेषा बरुआ ने अपनी नृत्य प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने ‘बाजलों तोमार आलोर बेनु’ और ‘ढाक बाजा, कसार बाजा’ गीतों पर नृत्य किया। इन प्रस्तुतियों में दुर्गोत्सव की पारंपरिक छटा देखने को मिली। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को प्रभावित किया।

दिया महतो ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। उन्होंने ‘साजो साजो देश बुजा’ और ‘आइगिरी नंदिनी’ की धुन पर नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों की सराहना मिली। दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिए।

भक्ति गीतों से भक्तिमय हुआ माहौल

नृत्य प्रस्तुतियों के साथ भक्ति संगीत ने भी आयोजन को खास बनाया। सुब्रतो बिस्वास, प्रताप बनर्जी, निशित गिरी और राणा ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम स्थल का वातावरण भक्तिमय हो गया। मां दुर्गा की आराधना और संगीत के बीच उपस्थित लोगों ने दुर्गोत्सव की खुशियां साझा कीं।

कार्यक्रम में संगीत और नृत्य के जरिए बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। आयोजन में शामिल कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को एक मंच पर लाने का प्रयास किया।

वृद्धाश्रम की 20 महिलाओं को दी गई सहायता

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक सेवा रहा। बंग बंधु की ओर से वृद्धाश्रम में रहने वाली 20 महिलाओं के लिए नए वस्त्रों की व्यवस्था की गई। इसके अलावा उन्हें दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री और खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। संस्था ने सभी महिलाओं के लिए मध्याह्न भोजन की व्यवस्था भी की।

इस पहल के जरिए संस्था ने त्योहार की खुशियों को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। दुर्गोत्सव जैसे अवसर पर बुजुर्ग महिलाओं के साथ खुशियां साझा करना आयोजन का अहम हिस्सा रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ सेवा गतिविधियों को शामिल करने से आयोजन का सामाजिक पक्ष भी सामने आया।

बंग बंधु के सदस्यों की रही भागीदारी

कार्यक्रम में नान्टु सरकार, विनोद दे, प्रणव बड़ाट, चयन गुहा, बाबूलाल चक्रवर्ती, नवनीता पात्र, रत्ना पात्रा, सौरभ बनर्जी, शुभ्रता बरुआ, सरबानी नंदी, जयश्री कर्मकार, संजीत दास और मधुमिता घोष सहित बंग बंधु के कई सदस्य उपस्थित थे। सभी ने आयोजन में भागीदारी निभाई।

बिष्टुपुर के मिलनी क्लब में आयोजित प्रतिमा वंदन कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामाजिक सेवा को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई। मां दुर्गा की आराधना से शुरू हुआ यह आयोजन भक्ति संगीत, नृत्य और जरूरतमंद महिलाओं की सहायता के साथ संपन्न हुआ।

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