NEET UG OMR : झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) में नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 पुनर्परीक्षा के अंक विवाद से जुड़ी याचिका का मंगलवार को निस्तारण हो गया। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा मूल ओएमआर शीट और संबंधित रिकॉर्ड अदालत में पेश किए जाने के बाद याचिकाकर्ता लक्ष्य सिंह ने अपनी याचिका वापस लेने का आग्रह किया। न्यायालय ने अनुरोध स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। इस घटनाक्रम के साथ परीक्षा परिणाम को लेकर उठे विवाद का न्यायिक अध्याय भी फिलहाल समाप्त हो गया।
NEET UG OMR: ओएमआर रिकॉर्ड पेश होने के बाद बदला रुख
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में हुई। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने एनटीए से सवाल किया था कि यदि वेबसाइट पर उपलब्ध ओएमआर शीट के आधार पर अभ्यर्थी के 660 अंक बन रहे हैं, तो परिणाम में केवल 116 अंक कैसे दर्ज किए गए। इसी प्रश्न के आधार पर अदालत ने एनटीए को मूल ओएमआर शीट, टेस्ट बुकलेट और संबंधित रिकॉर्ड सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
मंगलवार को एनटीए ने अदालत के समक्ष मूल ओएमआर शीट, टेस्ट बुकलेट (सीरियल नंबर-265208914) तथा रोल नंबर-2603107066 से संबंधित मूल अभिलेख प्रस्तुत किए। रिकॉर्ड देखने के बाद याचिकाकर्ता की ओर से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
NEET UG OMR: 660 और 116 अंकों के अंतर को लेकर उठा था विवाद
याचिका में दावा किया गया था कि एनटीए की वेबसाइट पर उपलब्ध स्कैन की गई ओएमआर शीट के आधार पर लक्ष्य सिंह के लगभग 660 अंक बन रहे थे, जबकि घोषित परिणाम में उन्हें केवल 116 अंक मिले थे। इसी कथित विसंगति को आधार बनाकर अभ्यर्थी ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए एनटीए से मूल रिकॉर्ड पेश करने को कहा था, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेज और आधिकारिक परिणाम में अंतर क्यों दिखाई दे रहा है।
मूल दस्तावेज सामने आने के बाद खत्म हुआ विवाद
अदालत में मूल ओएमआर शीट और अन्य अभिलेख पेश होने के बाद याचिकाकर्ता ने आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं बताई और याचिका वापस लेने का आग्रह किया। इसके बाद न्यायालय ने मामले का निस्तारण करते हुए याचिका खारिज कर दी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा संबंधी विवादों में मूल रिकॉर्ड की न्यायिक जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे मामलों में अदालतें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के साथ मूल दस्तावेजों का भी परीक्षण कर तथ्यों की पुष्टि करती हैं, जिससे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहती है।
परीक्षा विवादों में पारदर्शिता पर जोर
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में परिणाम से जुड़े किसी भी विवाद की स्थिति में अभ्यर्थियों को उपलब्ध वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। वहीं परीक्षा एजेंसियों के लिए भी यह आवश्यक है कि अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड सुरक्षित और सत्यापन योग्य रहें, ताकि किसी भी प्रकार की शंका का समय पर समाधान किया जा सके।
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