JPSC CBI Probe Demand | झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास (Raghuwar Das) ने राज्य सरकार पर निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जेपीएससी (JPSC), जेएसएससी (JSSC) और सीजीएल (CGL) परीक्षाओं में लगाए जा रहे आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रों का भरोसा तभी बहाल होगा, जब पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाएगी।
JPSC CBI Probe Demand | छात्रों से संवाद और निष्पक्ष जांच की अपील
मंगलवार को जमशेदपुर परिसदन में आयोजित प्रेसवार्ता में रघुवर दास ने कहा कि उनका पत्र किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों प्रतियोगी छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर लिखा गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों से जल्द बातचीत कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
रघुवर दास ने कहा कि लंबे समय से राज्य की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं। इससे युवाओं का विश्वास भर्ती प्रक्रिया से लगातार कमजोर हुआ है। उनका कहना था कि जब छात्र अपनी पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं, तब सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।
JPSC CBI Probe Demand | सीआईडी नहीं, स्वतंत्र एजेंसी पर जताया भरोसा
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार ने नीट परीक्षा में पेपर लीक के मामले की जांच सीबीआई को सौंपी और छात्रों से संवाद स्थापित किया, तो झारखंड सरकार जेपीएससी, जेएसएससी और सीजीएल परीक्षाओं में लगे आरोपों की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने से क्यों बच रही है।
उन्होंने कहा कि यदि जांच सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाती है तो उसके निष्कर्षों पर अभ्यर्थियों का विश्वास अधिक होगा। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच से न केवल दोषियों की पहचान होगी, बल्कि भविष्य में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग
रघुवर दास ने कहा कि राज्य सरकार को दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीकी रूप से सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए स्थायी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद दोबारा उत्पन्न न हों।
उन्होंने कहा कि झारखंड के युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर निर्णय लेने की आवश्यकता है।
आंदोलन को लेकर दी चेतावनी
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकार समय रहते छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति बनने पर इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। उन्होंने दोहराया कि संवाद, निष्पक्ष जांच और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था ही इस विवाद का स्थायी समाधान हो सकती है।
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