spot_img
spot_img
HomeNew DelhiAIIMS New Delhi: प्रख्यात न्यूरोसर्जन पद्मश्री डॉ. अशोक महापात्रा का निधन

Related Posts

AIIMS New Delhi: प्रख्यात न्यूरोसर्जन पद्मश्री डॉ. अशोक महापात्रा का निधन

74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, जगा-बलिया के सफल ऑपरेशन से रचा था इतिहास

​AIIMS New Delhi: देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार महापात्रा का निधन हो गया है। उन्होंने 74 वर्ष की आयु में नई दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और उनका इलाज चल रहा था। डॉ. महापात्रा मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले थे। उन्होंने चिकित्सा और न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में भारत को अंतरराष्ट्रीय पटल पर विशेष पहचान दिलाई। वे एम्स भुवनेश्वर के संस्थापक निदेशक रहे। इसके साथ ही उन्होंने एम्स नई दिल्ली के न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष का पदभार भी संभाला था। उनके निधन से पूरे देश के चिकित्सा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

​AIIMS New Delhi में जगा-बलिया के ऐतिहासिक ऑपरेशन से मिली थी वैश्विक ख्याति

​डॉ. अशोक कुमार महापात्रा को साल 2017 में ऐतिहासिक सर्जरी के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली। उन्होंने ओडिशा के कंधमाल जिले के सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों जगा और बलिया को अलग करने वाली मेडिकल टीम का सफल नेतृत्व किया था। यह ऑपरेशन चिकित्सा इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ था। सिर से जुड़े बच्चों को अलग करने की यह सर्जरी अत्यंत जटिल और जोखिम भरी थी। कई चरणों में चली इस मैराथन सर्जरी को उन्होंने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उनके इस साहसिक और कुशल प्रयास ने देश-विदेश में भारतीय चिकित्सा और न्यूरोसर्जरी का परचम लहराया। दोनों बच्चों को नया जीवन देकर उन्होंने दुनिया भर के डॉक्टरों के सामने एक अनूठा उदाहरण पेश किया था।

​AIIMS New Delhi समेत कई शीर्ष संस्थानों के नेतृत्व का रहा लंबा अनुभव

​डॉ. महापात्रा का अकादमिक और प्रशासनिक करियर भी बेहद गौरवशाली रहा। उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित स्वास्थ्य और शैक्षणिक संस्थानों का नेतृत्व किया। वे लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) के निदेशक रहे। इसके बाद उन्होंने भुवनेश्वर स्थित शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान (एसओए) मानद विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए। एम्स भुवनेश्वर की स्थापना और उसे देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में शुमार कराने में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा। वे हमेशा मरीजों की बेहतर देखभाल और उन्नत तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते रहे।

​चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा के लिए वर्ष 2025 में मिला था पद्मश्री

​चिकित्सा विज्ञान, समाज सेवा और न्यूरोसर्जरी में अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से नवाजा गया था। अपने चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने हजारों गंभीर मरीजों को नया जीवन दिया। वे न केवल एक कुशल सर्जन थे, बल्कि एक समर्पित शिक्षक और शोधकर्ता भी थे। उन्होंने देश के सैकड़ों युवा डॉक्टरों को न्यूरोसर्जरी का गहन प्रशिक्षण दिया। उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए विशेषज्ञ न्यूरोसर्जन आज देश-दुनिया के बड़े अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सा जगत उनके योगदान को सदैव कृतज्ञता से याद रखेगा।

​राजनीतिक हस्तियों और चिकित्सा जगत के दिग्गजों ने जताया गहरा शोक

​डॉ. अशोक कुमार महापात्रा के देहावसान पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, वरिष्ठ चिकित्सकों, शिक्षाविदों और आम नागरिकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। श्रद्धांजलि देने वालों ने कहा कि देश ने एक महान चिकित्सक और दूरदर्शी मार्गदर्शक खो दिया है। उनके द्वारा स्थापित उच्च नैतिक मूल्य और चिकित्सा के क्षेत्र में किए गए शोध कार्य आने वाली पीढ़ियों के डॉक्टरों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे। ओडिशा से लेकर राजधानी दिल्ली तक हर वर्ग के लोगों ने उनके परिवार, शुभचिंतकों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

इसे भी पढ़ें : Veterinary Doctors: झारखंड हाईकोर्ट से सरकार को राहत, DACP आदेश पर रोक

Latest Posts