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Jharkhand DGP Appointment: सुप्रीम कोर्ट में कल होगी अहम सुनवाई

तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ करेगी विचार, डीजीपी तदाशा मिश्र और नियुक्ति नियमावली पर फैसला संभव

Jharkhand DGP Appointment: सुप्रीम कोर्ट में झारखंड डीजीपी नियुक्ति मामले पर कल सुनवाई होगी। राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नियमावली की वैधता जांची जाएगी। इसके साथ ही तदाशा मिश्र की नियुक्ति पर भी सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय विशेष पीठ करेगी। पीठ में न्यायाधीश सूर्यकांत, जॉयमाल्या बागची और वी मोहना शामिल हैं। यह मामला नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने नियुक्ति नियमावली और उसमें किए गए संशोधनों को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत के फैसले पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं। कल होने वाली यह सुनवाई राज्य के लिए बेहद अहम है।

Jharkhand DGP Appointment: बाबूलाल मरांडी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

बाबूलाल मरांडी ने पहले झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने राज्य सरकार की नई नियुक्ति नियमावली को असंवैधानिक बताया था। उन्होंने अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर अवमानना याचिका भी लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में अवमानना याचिका को खारिज कर दिया था। लेकिन मुख्य याचिका को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित कर लिया गया। याचिका ट्रांसफर करने के बाद अदालत ने एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था। एमिकस क्यूरी को प्रकाश सिंह मामले के दिशा-निर्देशों पर राय देनी थी। उन्होंने इन धाराओं को शीर्ष अदालत के आदेशों के विपरीत बताया। इसके आधार पर उन्होंने तदाशा मिश्र की नियुक्ति को गलत करार दिया।

Jharkhand DGP Appointment: केंद्र सरकार ने भी नियमावली को बताया अदालत की अवमानना

मामले में केंद्र सरकार ने भी अदालत में आईए दायर की है। केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार की नियुक्ति नियमावली को गलत बताया है। केंद्र ने इसे न्यायालय की अवमानना का सीधा मामला बताया। अदालत ने आठ अक्टूबर 2026 को अहम टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा कि संशोधित नियमावली दिशा-निर्देशों के विपरीत दिखती है। नियम रद्द होने पर डीजीपी की नियुक्ति भी रद्द हो जाएगी। तदाशा मिश्र की डीजीपी पद पर नियुक्ति स्वतः समाप्त मानी जाएगी। अदालत ने तदाशा मिश्र को अपना पक्ष रखने को कहा था। इस निर्देश के बाद कानूनी प्रक्रिया और तेज हो गई है।

अदालत ने तदाशा मिश्र और राज्य सरकार को दिया था पक्ष रखने का निर्देश

शीर्ष अदालत ने तदाशा मिश्र को पक्ष रखने का मौका दिया। झारखंड सरकार को भी अपना मंतव्य रखने की अनुमति मिली। सरकार नियमावली के समर्थन में अपनी बात रख सकती है। अदालत ने यूपीएससी को एमिकस क्यूरी की सहायता का निर्देश दिया। संघ लोक सेवा आयोग मामले में आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध कराएगा। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दलीलें पेश करेंगे। सरकार का कहना है कि उसे पुलिस नियमावली बनाने का अधिकार है। याचिकाकर्ता पक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों का हवाला दे रहा है। कल दोनों पक्षों के बीच जोरदार कानूनी बहस देखने को मिलेगी।

प्रकाश सिंह मामले के दिशा-निर्देशों पर टिका है पूरा कानूनी विवाद

प्रकाश सिंह मामले का न्यायिक फैसला पुलिस सुधारों में ऐतिहासिक है। सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी चयन के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की थी। इसके तहत वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल यूपीएससी को भेजना अनिवार्य है। यूपीएससी तीन योग्य अधिकारियों का नाम राज्य सरकार को भेजती है। राज्य सरकार को उन्हीं तीन नामों में से डीजीपी चुनना होता है। झारखंड सरकार ने नई नियमावली बनाकर इस प्रक्रिया में बदलाव किया था। इसी संशोधन को लेकर अब कानूनी वैधता पर तलवार लटक रही है। अदालत के अंतिम निर्णय से राज्य पुलिस नेतृत्व की दिशा तय होगी। सभी की नजरें कल आने वाले न्यायिक आदेश पर टिकी हैं।

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