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Mahuadanr CHC Latehar: अस्पताल में ओआरएस तक नहीं

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जरूरी दवा का टोटा, स्वास्थ्य मंत्री के दावों पर उठे सवाल

Mahuadanr CHC Latehar: राज्य में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के दावे किए जा रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने की बातें हो रही हैं। लेकिन लातेहार के महुआडांड़ अस्पताल की तस्वीर दावों से बिल्कुल जुदा है। महुआडांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी में जरूरी दवाएं गायब हैं। यहां ओआरएस जैसी अति आवश्यक स्वास्थ्य सामग्री का टोटा है। अस्पताल पहुंचने वाले गरीब मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। तीमारदारों को बाहर की दुकानों से ओआरएस खरीदना पड़ रहा है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के इस प्रमुख अस्पताल की हालत चिंताजनक है। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

Mahuadanr CHC Latehar: ऊपर से आपूर्ति नहीं मिलने का हवाला दे रहा विभाग

अस्पताल में ओआरएस की अनुपलब्धता पर कर्मियों से सवाल पूछे गए। स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मी ने चौंकाने वाला बयान दिया। कर्मी ने बताया कि ऊपर से दवाओं की आपूर्ति नहीं आ रही। आपूर्ति बाधित होने के कारण अस्पताल में ओआरएस का स्टॉक खत्म है। इस गैरजिम्मेदाराना जवाब ने आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोल दी है। जब ओआरएस जैसी प्राथमिक सामग्री ही नहीं मिल रही, तो क्या कहें। अन्य जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। प्रखंड के गरीब लोग पूरी तरह सरकारी अस्पताल पर निर्भर रहते हैं। ऐसी लापरवाही से गरीब मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

Mahuadanr CHC Latehar: स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के दावों की खुली पोल

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी बेहतर चिकित्सा सुविधा का लगातार दावा करते हैं। वे अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने की लगातार घोषणाएं करते हैं। लेकिन महुआडांड़ सीएचसी की स्थिति उनके दावों पर सवालिया निशान लगाती है। सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है। दस्त, उल्टी और पानी की कमी में ओआरएस जीवनरक्षक माना जाता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह दवा बेहद जरूरी मानी जाती है। अस्पताल में ओआरएस का न होना स्वास्थ्य विभाग की नाकामी दर्शाता है। धरातल पर जरूरी दवाएं पहुंचाना स्वास्थ्य विभाग की सबसे प्राथमिक जिम्मेदारी है। अधिकारी सुदूर ग्रामीण इलाकों की बदहाली को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं।

स्वास्थ्य सचिव और सिविल सर्जन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

महुआडांड़ के प्रखंडवासियों ने इस लचर व्यवस्था पर कड़ा रोष जताया है। ग्रामीणों ने मंत्री, स्वास्थ्य सचिव और सिविल सर्जन से गुहार लगाई। लोगों ने तत्काल हस्तक्षेप कर जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने की मांग की। अस्पताल में दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना विभाग का पहला कर्तव्य है। यदि आपूर्ति व्यवस्था में कोई समस्या है, तो उसका शीघ्र समाधान हो। गरीब आदिवासियों को इलाज के लिए निजी दुकानों पर न भटकना पड़े। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस लापरवाही पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। जल्द दवाएं न मिलने पर ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

दावों से नहीं, अस्पतालों की जमीनी सुविधाओं से परखी जाएगी व्यवस्था

स्वास्थ्य व्यवस्था की परख केवल बड़े भाषणों से नहीं की जा सकती। राजधानी में बैठकर किए गए दावे ग्रामीण धरातल पर टिक नहीं पाते। असली परख इस बात से है कि मरीज को क्या सुविधा मिली। क्या गरीब मरीज को समय पर निशुल्क दवा मिल पा रही है? महुआडांड़ सीएचसी में बुनियादी दवाओं का अभाव गंभीर प्रशासनिक चूक है। प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त बफर स्टॉक होना चाहिए। जिला प्रशासन को अस्पतालों का नियमित औचक निरीक्षण करना चाहिए। स्थानीय स्तर पर आपातकालीन दवा खरीद की व्यवस्था सक्रिय होनी चाहिए। विभाग को तत्काल महुआडांड़ में ओआरएस की खेप भेजनी चाहिए।

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