पोटका के पीएम श्री कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में सुरक्षित बचपन अभियान, कानूनी सुरक्षा, बाल विवाह और साइबर अपराध से बचाव पर जागरूकता कार्यक्रम
Child Rights: पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका स्थित पीएम श्री कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में छात्राओं को बाल अधिकारों और उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), जमशेदपुर की ओर से सुरक्षित बचपन अभियान के तहत यह पहल की गई। कार्यक्रम में छात्राओं को व्यक्तिगत सुरक्षा, बाल विवाह की रोकथाम, साइबर अपराध और बच्चों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण के बारे में बताया गया। इसका उद्देश्य छात्राओं को अपने अधिकारों की जानकारी देना और किसी भी तरह के अनुचित व्यवहार की स्थिति में मदद लेने के लिए प्रेरित करना था।
Child Rights:अभियान के तहत निकाली गई प्रभात फेरी
कार्यक्रम की शुरुआत प्रभात फेरी और जागरूकता रैली से हुई। इसमें विद्यालय की छात्राओं ने हिस्सा लिया। रैली के दौरान बाल अधिकार, सुरक्षित बचपन और बाल विवाह की रोकथाम से जुड़े नारे लगाए गए। छात्राओं ने संदेश दिया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित माहौल, शिक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में परिवार, विद्यालय और समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया।
Child Rights: पॉक्सो अधिनियम और कानूनी संरक्षण की दी जानकारी
डीएलएसए की लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) की रंजना पांडेय ने छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों और बच्चों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार होने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। छात्राओं को अपनी परेशानी किसी विश्वसनीय वयस्क, शिक्षक या संबंधित अधिकारी के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया गया। जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता भी ली जा सकती है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार, बच्चों को निःशुल्क कानूनी सहायता पाने का अधिकार है। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क किया जा सकता है।
साइबर अपराध और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सतर्कता
पोटका पुलिस के सहायक अवर निरीक्षक कर्मू राम ने छात्राओं को साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। छात्राओं को बताया गया कि इंटरनेट पर निजी जानकारी साझा करने से परेशानी हो सकती है। अनजान लोगों के साथ व्यक्तिगत विवरण साझा करने और संदिग्ध संदेशों पर भरोसा करने से बचना चाहिए। ऑनलाइन किसी तरह की धमकी, धोखाधड़ी या अनुचित व्यवहार का सामना होने पर विश्वसनीय व्यक्ति की मदद लेनी चाहिए। डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित इस्तेमाल करना आज के समय में जरूरी है।
बाल विवाह के दुष्परिणामों से कराया अवगत
बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) विभाग की प्रतिनिधि शांति देवी ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को शिक्षा जारी रखने और अपने भविष्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। बाल विवाह बच्चों की पढ़ाई, विकास और भविष्य के अवसरों पर असर डाल सकता है। उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षित वातावरण के महत्व को समझाया। अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों को कम उम्र में विवाह के बजाय शिक्षा और विकास के अवसर मिलने चाहिए।
प्रतियोगिताओं के जरिए समझाए गए बाल सुरक्षा के मुद्दे
छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने और विषयों को सरल तरीके से समझाने के लिए कई रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें चित्रकला, क्विज, नारा लेखन और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं शामिल थीं। छात्राओं ने बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और सुरक्षित बचपन से जुड़े विषयों पर अपनी समझ प्रस्तुत की। इन गतिविधियों के माध्यम से कानूनी जानकारी को रोचक तरीके से सामने लाने का प्रयास किया गया। प्रतियोगिताओं ने छात्राओं को अपने विचार व्यक्त करने और सामाजिक मुद्दों को समझने का अवसर दिया।
विद्यालय के शिक्षक और पीएलवी भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में विद्यालय की वार्डन रूमा हलधर, वरिष्ठ शिक्षिका ज्योति कुमारी और लीगल लिटरेसी क्लब की समन्वयक सुचित्रा कुमारी सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्राएं और पैरा लीगल वॉलंटियर (पीएलवी) उपस्थित रहे। अभियान में चयन कुमार मंडल, डोबो चाकिया, छाकू माझी, ललिता पुरान, मीरा मुंडा, ज्योत्सना गोप, गौतम सरदार, राजेश महाली, मकरो कर्मकार, सबिता सोरेन, कुरुमिता मुर्मू, अभिषेक उपाध्याय और सूरज कुमार ने भी भाग लिया।
सुरक्षित बचपन के लिए जागरूकता पर जोर
कार्यक्रम के जरिए छात्राओं को यह समझाने का प्रयास किया गया कि अपने अधिकारों की जानकारी होना और जरूरत के समय मदद मांगना महत्वपूर्ण है। बाल संरक्षण केवल कानून लागू करने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज की भी भागीदारी जरूरी है। सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सम्मान और कानूनी संरक्षण बच्चों के विकास के अहम आधार हैं। सुरक्षित बचपन अभियान का उद्देश्य इन्हीं पहलुओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाना है।
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