स्टेंट निकलवाने प्रगति नर्सिंग होम पहुंची थी 22 वर्षीय मोनी परवीन, इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
Dhanbad Hospital विवाद के बीच सरायढेला स्थित प्रगति नर्सिंग होम में 22 वर्षीय मोनी परवीन की मौत के बाद सोमवार देर रात हंगामा हुआ। मृतका लोयाबाद की रहने वाली थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। मामले की जानकारी मिलने पर धनबाद के मेयर संजीव सिंह देर रात अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मृतका के परिजनों और अस्पताल प्रबंधन से बातचीत की। लंबी वार्ता के बाद परिजनों को सात लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति बनी। इसके बाद परिवार के लोग शव लेकर अस्पताल से रवाना हो गए।
Dhanbad Hospital में स्टेंट निकलवाने आई थी महिला
परिजनों के अनुसार, मोनी परवीन का करीब डेढ़ महीने पहले इसी प्रगति नर्सिंग होम में पथरी का ऑपरेशन हुआ था। उस समय उनके शरीर में एक स्टेंट डाला गया था। सोमवार को स्टेंट निकलवाने के लिए उन्हें दोबारा अस्पताल बुलाया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह घर लौट आएंगी। हालांकि, अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने इलाज की प्रक्रिया और अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए।
Dhanbad Hospital: पैसे जमा कराने के बाद ऑपरेशन थिएटर में ले जाने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद पहले उनसे पैसे जमा कराने को कहा गया। इसके बाद मोनी परवीन को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। परिवार के मुताबिक, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जैसे ही यह जानकारी बाहर इंतजार कर रहे परिजनों तक पहुंची, वे आक्रोशित हो गए। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा और संबंधित चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मौत के बाद अस्पताल परिसर में बढ़ा तनाव
महिला की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ जुट गई। परिजन इस बात से नाराज थे कि स्टेंट निकलवाने के लिए अस्पताल पहुंची महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई। उन्होंने मामले की जानकारी और जवाबदेही तय करने की मांग की। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और हालात संभालने का प्रयास किया। मौत के कारणों को लेकर परिवार और अस्पताल प्रबंधन के बीच बातचीत की जरूरत महसूस हुई।
मेयर संजीव सिंह ने परिजनों से की बातचीत
घटना की सूचना मिलने के बाद धनबाद के मेयर संजीव सिंह प्रगति नर्सिंग होम पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले मृतका के परिजनों से मुलाकात की और उनकी बात सुनी। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन के साथ बातचीत शुरू हुई। वार्ता के दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति और मोनी परवीन के छोटे बच्चों के भविष्य का मुद्दा भी सामने आया। परिवार इस मुश्किल समय में सहायता और मामले को लेकर स्पष्ट जवाब चाहता था।
सात लाख रुपये की सहायता पर बनी सहमति
काफी देर तक चली बातचीत के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से मृतका के परिजनों को सात लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई गई। इसके बाद देर रात परिवार के लोग शव लेकर अस्पताल से रवाना हो गए। हालांकि, आर्थिक सहायता पर सहमति बनने से महिला की मौत के कारणों से जुड़े सवाल खत्म नहीं होते। इलाज के दौरान क्या हुआ और किन परिस्थितियों में उनकी जान गई, यह स्पष्ट होना अभी बाकी है।
मेयर बोले, दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े होने का प्रयास
मेयर संजीव सिंह ने कहा कि महिला की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ऐसे कठिन समय में परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें सहयोग दिलाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला चिकित्सकीय पहलुओं से जुड़ा है। इसलिए मौत के कारणों पर बिना तथ्यों के टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। परिजनों ने जो मुद्दे उठाए हैं, उन पर अस्पताल प्रबंधन को ध्यान देने की बात कही गई है।
अस्पताल प्रबंधन ने कार्डियक अरेस्ट आने की बात कही
प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, प्रगति नर्सिंग होम के संचालक जेपी खेतान ने बताया कि प्रक्रिया के दौरान महिला को कार्डियक अरेस्ट आया था। उनके मुताबिक, चिकित्सकों ने महिला को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस पक्ष के सामने आने के बावजूद मौत की परिस्थितियों को लेकर उठे सभी सवालों का जवाब उपलब्ध नहीं है। परिजनों के आरोपों और अस्पताल प्रबंधन के बयान की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मौत की वजह और लापरवाही के आरोपों पर जवाब बाकी
मोनी परवीन की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्टेंट निकलवाने के लिए अस्पताल पहुंची 22 वर्षीय महिला की हालत अचानक कैसे बिगड़ी। क्या यह किसी चिकित्सकीय जटिलता का परिणाम था या इलाज के दौरान कोई चूक हुई? फिलहाल उपलब्ध जानकारी से इन सवालों का निश्चित जवाब नहीं मिलता। मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय तथ्यों और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। सात लाख रुपये की सहायता पर बनी सहमति परिवार को तत्काल आर्थिक सहयोग दे सकती है, लेकिन मौत के कारणों और लगाए गए आरोपों पर स्पष्टता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
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