- झारखंड हाई कोर्ट ने जांच में देरी पर जताई नाराजगी, SIT की लापरवाही पर CBI जांच की चेतावनी
रांची : झारखंड के बोकारो से 18 वर्षीय युवती की गुमशुदगी से जुड़े चर्चित मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य की डीजीपी से पूछा कि बरामद नरकंकाल का अब तक डीएनए टेस्ट क्यों नहीं कराया गया, जबकि कंकाल मिले कई दिन बीत चुके हैं।
कोर्ट ने पूछा – क्या माता-पिता का सैंपल लिया गया?
सुनवाई के दौरान प्रार्थी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जंगल से बरामद कंकाल लापता युवती का नहीं है। इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि कंकाल का पोस्टमार्टम, एफएसएल जांच और डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा:
- क्या बरामद कंकाल का डीएनए टेस्ट अब तक हुआ है?
- क्या युवती के माता-पिता का सैंपल लिया गया है?
सरकार इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी।
DGP, Bokaro SP, FSL Director और SIT को तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने:
- डीजीपी
- बोकारो एसपी
- एफएसएल डायरेक्टर
- नई SIT टीम
को सभी दस्तावेजों के साथ गुरुवार को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
कोर्ट ने कहा – लापरवाही मिली तो CBI को सौंपेंगे जांच
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि यदि SIT जांच में लापरवाही पाई गई तो मामला CBI को सौंपा जा सकता है। अदालत ने टिप्पणी की कि:
- माता-पिता और कंकाल का सैंपल लेकर 3-4 घंटे में डीएनए रिपोर्ट आ सकती थी, फिर इतनी देरी क्यों?”
आरोपी गिरफ्तार, 28 पुलिसकर्मी निलंबित
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि:
- आरोपी दिनेश महतो को गिरफ्तार कर लिया गया है
- बोकारो जंगल से कंकाल बरामद हुआ है
- जांच में लापरवाही बरतने पर
पिंडराजोड़ा थाना प्रभारी सहित 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है
जुलाई 2025 से लापता थी युवती
उल्लेखनीय है कि:
- युवती 31 जुलाई 2025 से लापता थी
- युवती की मां ने हाई कोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की है
- मामला पिंडराजोड़ा थाना कांड संख्या 147/2025 के तहत दर्ज है
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