- महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर दो वर्षीय राष्ट्रीय स्मरणोत्सव, पीएम मोदी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित
Jyotiba Phule 200th Anniversary / Jamshedpur : महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए केंद्र सरकार ने दो वर्षीय राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम 11 अप्रैल 2026 से 11 अप्रैल 2028 तक पूरे देश में चलेगा। इस आयोजन का उद्देश्य फुले के विचारों, सामाजिक न्याय के सिद्धांतों और उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाना है। इस महत्वाकांक्षी पहल के सफल संचालन के लिए केंद्र सरकार ने बहुस्तरीय संरचना तैयार की है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति (एनआईसी) को 6 अप्रैल 2026 को औपचारिक मंजूरी दी गई, जिसकी अधिसूचना संस्कृति मंत्रालय द्वारा जारी की गई है।
पीएम मोदी की अध्यक्षता में बनेगी रणनीति
इस स्मरणोत्सव की नीति निर्धारण और निगरानी के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 126 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में देश की प्रमुख राजनीतिक, न्यायिक और सामाजिक हस्तियों को शामिल किया गया है। समिति में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, राम नाथ कोविंद, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा, पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और के.जी. बालकृष्णन जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं।
इसके अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत भी समिति का हिस्सा हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सहित 34 केंद्रीय मंत्रियों को भी इस समिति में शामिल किया गया है। वहीं सांसद एस फांग्नोन कोन्यक, आर कृष्णैया, अमोल कोल्हे, ज्योति वाघमारे, पी.टी. उषा और उपेंद्र कुशवाहा जैसे जनप्रतिनिधियों को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है।
झारखंड को मिली विशेष भागीदारी, पूर्णिमा साहू शामिल
इस राष्ट्रीय समिति में झारखंड के लिए यह गर्व का क्षण है कि जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू को एकमात्र महिला सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह उनके राजनीतिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
पूर्णिमा साहू ने इस जिम्मेदारी के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने समाज के वंचित वर्गों, महिलाओं और पिछड़ों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के लिए उनका संघर्ष आज भी प्रासंगिक है।
नीति, कार्यक्रम और समयसीमा तय करेगी समिति
यह उच्चस्तरीय समिति दो वर्षों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय अभियान की संपूर्ण रूपरेखा तैयार करेगी। कार्यक्रमों की योजना, स्वीकृति, क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी इसी समिति के पास होगी। साथ ही, आयोजन को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए समय=सीमा और रणनीति भी तय की जाएगी।
जमशेदपुर महानगर प्रवक्ता प्रेम झा ने बताया कि यह स्मरणोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और नई पीढ़ी को फुले के आदर्शों से जोड़ने का राष्ट्रीय अभियान होगा।
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