spot_img
spot_img
Homeकोयला क्षेत्रबोकारोBokaro Jackal Attack: सियारों का बढ़ा खतरा, तीन की मौत

Related Posts

Bokaro Jackal Attack: सियारों का बढ़ा खतरा, तीन की मौत

बोकारो के तीन प्रखंडों में जंगली सियारों के हमलों से दहशत, कई ग्रामीण घायल; वन विभाग ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी

Bokaro Jackal Attack: झारखंड में जंगली हाथियों के हमलों के बीच अब बोकारो जिले में जंगली सियारों का आतंक ग्रामीणों के लिए नई मुसीबत बन गया है। जिले के जंगलों से सटे गांवों में सियार लगातार लोगों को निशाना बना रहे हैं। हमलों की घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक सियारों के हमले में तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि 17 लोग घायल हुए हैं। नवंबर की शुरुआत में भी हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल है। लोग सुबह और शाम घर से बाहर निकलने में भी सतर्कता बरत रहे हैं।

Bokaro Jackal Attack से पेटरवार, कसमार और जरीडीह में सबसे अधिक चिंता

बोकारो जिले के पेटरवार, कसमार और जरीडीह प्रखंड के कई गांवों में सियारों के हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें चौड़ा, हिसिम, दुर्गापुर, खेतको, बेलडीह, चलकरी, चांपी, मायापुर और टांगटोना सहित आसपास के गांव शामिल हैं। इन इलाकों में जंगल और आबादी के बीच दूरी कम होने के कारण ग्रामीणों का अक्सर वन क्षेत्र के आसपास आना-जाना रहता है।

खेतों में काम करने वाले किसान, मवेशी चराने जाने वाले लोग और सुबह-शाम जरूरी काम से बाहर निकलने वाले ग्रामीण इन हमलों की चपेट में आ रहे हैं। हाल के दिनों में चांपी और चौड़ा गांव में भी हमले की घटनाएं सामने आई हैं। कसमार के चौड़ा गांव में एक ही सुबह दो ग्रामीणों पर हमले की खबर आई थी। वहीं, तेनु-बोकारो नहर के आसपास के गांवों में भी कम समय के भीतर पांच ग्रामीणों के घायल होने की सूचना सामने आई।

Bokaro Jackal Attack: आंकड़ों में अंतर, वन्यजीव हमलों ने बढ़ाई चिंता

सियारों के हमलों को लेकर सामने आ रहे आंकड़ों में कुछ अंतर भी है। उपलब्ध जानकारी में वर्ष 2026 के दौरान तीन लोगों की मौत और 17 लोगों के घायल होने का उल्लेख है। हालांकि, 4 नवंबर को प्रकाशित एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में तीन प्रखंडों में अब तक चार मौत और 20 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में मौत और घायलों की वास्तविक संख्या की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

लगातार हो रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि जंगल के आसपास जाने में अब अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित हैं। ग्रामीण इलाकों में यह डर भी है कि कहीं सियार अचानक घरों या बस्तियों में प्रवेश कर लोगों पर हमला न कर दें।

वन विभाग ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी

बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग की ओर से सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ग्रामीणों को सुबह, शाम और रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। जरूरत पड़ने पर समूह में निकलने और अपने साथ लाठी तथा टॉर्च रखने को कहा गया है।

वन विभाग ने बच्चों और बुजुर्गों को अकेला नहीं छोड़ने की भी अपील की है। ग्रामीणों को अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। जंगल या गांव के आसपास कोई हिंसक अथवा संदिग्ध व्यवहार करने वाला सियार दिखाई देने पर उसके नजदीक जाने की मनाही की गई है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि जंगली जानवर को घेरने, पकड़ने या उसे खुद भगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी चाहिए। किसी भी अप्रिय घटना या संदिग्ध वन्यजीव की गतिविधि की जानकारी तत्काल पंचायत प्रतिनिधियों, पुलिस अथवा स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों को देनी चाहिए।

सियार के काटने पर 15 मिनट तक करें घाव की सफाई

वन विभाग ने सियार के हमले के बाद होने वाले संभावित संक्रमण को लेकर भी लोगों को आगाह किया है। विशेष रूप से रेबीज का खतरा गंभीर हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमित जानवर के काटने या खरोंचने से रेबीज का संक्रमण फैल सकता है। इसलिए किसी भी जंगली जानवर के काटने को मामूली चोट समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति को सियार काट लेता है, तो सबसे पहले घाव को साबुन और बहते साफ पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल पहुंचना जरूरी है। चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) लगवानी चाहिए। गंभीर घाव या संक्रमण की आशंका वाले मामलों में रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) की भी जरूरत पड़ सकती है। इसका निर्णय चिकित्सक घाव की स्थिति और संक्रमण के जोखिम को देखकर करते हैं।

राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम और विश्व स्वास्थ्य संगठन भी जानवर के काटने के बाद तत्काल घाव की सफाई और चिकित्सकीय उपचार की सलाह देते हैं। रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद बीमारी बेहद घातक हो सकती है। इसलिए उपचार में किसी तरह की देरी नहीं करनी चाहिए।

वन्यजीव हमले में मौत या घायल होने पर मुआवजे का प्रावधान

वन विभाग की जानकारी के अनुसार, जंगली जानवरों के हमले में किसी व्यक्ति के घायल होने या उसकी मृत्यु होने पर सरकारी मुआवजे का प्रावधान है। इसके लिए प्रभावित परिवार संबंधित स्थानीय वन पदाधिकारी या वनरक्षी से संपर्क कर सकते हैं। मुआवजे की प्रक्रिया के लिए घटना की जानकारी और आवश्यक दस्तावेज विभाग को उपलब्ध कराने होते हैं।

सियारों के हमलों ने एक बार फिर वन्यजीवों और ग्रामीण आबादी के बीच बढ़ते संघर्ष की चुनौती को सामने ला दिया है। झारखंड के कई इलाकों में हाथियों की आवाजाही से पहले ही ग्रामीण परेशान हैं। अब बोकारो में सियारों के हमलों ने एक नई चिंता पैदा कर दी है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन विभाग इन घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान देगा। साथ ही प्रभावित गांवों में निगरानी और जागरूकता बढ़ाई जाएगी, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। फिलहाल ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे सावधानी बरतें और किसी भी वन्यजीव के साथ खुद से भिड़ने के बजाय इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

Read also: ISM Ranchi Diwali: आईएसएम कॉलेज पुंदाग में धूमधाम से मनी दीपावली

Latest Posts