हाईकोर्ट के कड़े आदेश के बाद केंद्रीय एजेंसी का बड़ा एक्शन, तत्कालीन कमिश्नर अनिमेश भारती और वाधवान बंधु नामजद आरोपी
Ranchi CBI FIR : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की रांची भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) में हुए 727.67 करोड़ रुपये के बहुचर्चित निवेश घोटाले में नियमित प्राथमिकी दर्ज कर ली है। झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा इस महाघोटाले को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिए गए सख्त निर्देश के आलोक में यह आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस बहुचर्चित वित्तीय अनियमितता की गहराई से तफ्तीश करने के लिए पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) कुलदीप कुमार को जांच अधिकारी (आईओ) नियुक्त किया है।
Ranchi CBI FIR: वाधवान बंधुओं पर कसा शिकंजा, धनबाद के अज्ञात अफसर भी लपेटे में
केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा दर्ज की गई इस प्राथमिकी में सीएमपीएफओ के तत्कालीन कमिश्नर अनिमेश भारती को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है। इसके अलावा देश भर में चर्चित दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के प्रमोटर एवं तत्कालीन निदेशक कपिल वाधवान और धीरज वाधवान को भी नामजद आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने सीएमपीएफओ मुख्यालय धनबाद में पदस्थापित कई तत्कालीन अज्ञात पदाधिकारियों और कर्मचारियों को भी साजिश में शामिल होने के आरोप में अभियुक्त की श्रेणी में रखा है।
जांच एजेंसी अब उन तमाम फाइलों और डिजिटल दस्तावेजों को जब्त करने की तैयारी में है जिनके जरिए नियमों को ताक पर रखकर यह भारी-भरकम रकम गैर-सरकारी वित्तीय कंपनी में ट्रांसफर की गई थी।
Ranchi CBI FIR : वित्तीय सलाहकार की अनदेखी उजागर, नियमों को ताक पर रखकर हुआ था निवेश
इस बड़े वित्तीय घोटाले की जड़ें वित्तीय नियमों के घोर उल्लंघन से जुड़ी हुई हैं। झारखंड उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में यह साक्ष्य प्रस्तुत किया गया था कि सीएमपीएफओ के तत्कालीन कमिश्नर ने संस्थान के अधिकृत वित्तीय सलाहकार की लिखित आपत्ति और प्रतिकूल राय को पूरी तरह दरकिनार कर दिया था।
वित्तीय जोखिम की चेतावनी के बावजूद मजदूरों और कर्मचारियों के भविष्य निधि कोष से 727.67 करोड़ रुपये की गाढ़ी कमाई को दीवान हाउसिंग फाइनेंस में निवेश कर दिया गया। इसके कुछ ही समय बाद डीएचएफएल कंपनी दिवालिया घोषित हो गई। कंपनी के दिवालिया होते ही सीएमपीएफओ को सीधे तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये का अपूरणीय आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। कोयला मजदूरों की गाढ़ी कमाई डूबने से पूरे कोयलांचल में हड़कंप मच गया था।
उच्च न्यायालय ने विभागीय लीपापोती पर लगाई कड़ी फटकार
मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि इतना बड़ा वित्तीय नुकसान सामने आने के बाद भी विभागीय स्तर पर लीपापोती की गई। आंतरिक जांच में दोषी पाए गए उच्च अधिकारियों के विरुद्ध कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय उन्हें उच्च स्तर से बचाने का प्रयास किया जा रहा था।
झारखंड उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद यह पाया कि दोषी अधिकारियों को संरक्षण देने की दलीलें बिल्कुल तथ्यात्मक और गंभीर हैं। अदालत ने विभागीय लीपापोती पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने का ऐतिहासिक आदेश पारित किया। सीबीआई अब इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि इस अवैध निवेश के बदले किन-किन अधिकारियों को वित्तीय लाभ पहुंचाए गए थे।


