संदीप प्रमाणिक हत्याकांड में अनुसंधान पर उठे सवाल, रांची एसएसपी को 30 नवंबर तक रिपोर्ट देने का निर्देश
Extreme Bar Case: रांची के चर्चित एक्सट्रीम बार हत्याकांड में झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस जांच में हुई चूकों पर नाराजगी जताई है। बुधवार को दोषियों की आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने अनुसंधान की कमियों को गंभीरता से लिया। कोर्ट के निर्देश पर रांची के एसएसपी भी सुनवाई में उपस्थित हुए। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया जांच में कई खामियां दिखाई दे रही हैं। महत्वपूर्ण साक्ष्य भी मुकदमे के रिकॉर्ड में नहीं लाए गए। कोर्ट ने एसएसपी को पूरे मामले की समीक्षा कर 30 नवंबर तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
Extreme Bar Case: जांच की कमियों की पहचान कर रिपोर्ट सौंपेंगे एसएसपी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अनुसंधान की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया लगता है कि मामले की जांच सही तरीके से नहीं हुई। कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्यों को भी रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया। कोर्ट ने एसएसपी को ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों का अध्ययन करने और अनुसंधान में हुई त्रुटियों की पहचान करने का निर्देश दिया।
एसएसपी को 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी है। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को भी कहा है। अब पुलिस की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि जांच के दौरान किन बिंदुओं पर चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।
Extreme Bar Case: एक अनुसंधानकर्ता निलंबित, दूसरे को नोटिस
सुनवाई के दौरान रांची के एसएसपी ने अदालत को बताया कि मामले के एक अनुसंधानकर्ता को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, दूसरे अनुसंधानकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने जांच में हुई कमियों को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है।
मामले में प्रतिवादी तुषार कांति दास की ओर से अधिवक्ता अनुराग कश्यप ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय ने पैरवी की। फिलहाल हाई कोर्ट में दोषियों की आपराधिक अपील पर सुनवाई जारी है।
10 दोषियों को सुनाई गई थी नौ-नौ साल की सजा
एक्सट्रीम बार हत्याकांड में अपर न्यायायुक्त शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने अभिषेक सिंह उर्फ विक्की समेत 10 लोगों को दोषी ठहराया था। सभी को नौ-नौ साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। अदालत ने सभी को गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी माना था।
सजा पाने वालों में अभिषेक सिंह, अशोक कुमार सिंह, मोहम्मद शामिरूदीन, प्रतीक, मृत्युंजय कुमार, प्रकाश कुमार, दिवाकर उपाध्याय, अलोक दीवा, पंकज कुमार और सुमित कुमार शामिल हैं। दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इसी अपील पर सुनवाई के दौरान जांच की खामियों का मुद्दा उठा है।
26 मई 2024 की रात हुई थी डीजे संदीप की हत्या
मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले डीजे संदीप प्रमाणिक की 26 मई 2024 की देर रात रांची के एक्सट्रीम बार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना से पहले बार के कर्मचारियों और कुछ युवकों के बीच विवाद हुआ था। इस दौरान मारपीट भी हुई। बाद में विवाद शांत होने पर युवक वहां से चले गए थे।
अभियोजन के अनुसार, अभिषेक सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर बदला लेने की योजना बनाई। आरोप है कि वह सेल सिटी स्थित अपने किराये के घर से राइफल लेकर दोबारा बार पहुंचा। वहां उसने संदीप प्रमाणिक को गोली मार दी। गोली लगने से संदीप की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद बार और पार्किंग क्षेत्र में कई राउंड फायरिंग करने के बाद आरोपी कार से फरार हो गया।
सीसीटीवी फुटेज से आगे बढ़ी थी पुलिस की जांच
घटना के अगले दिन रांची के एसएसपी और सिटी डीएसपी घटनास्थल पर पहुंचे थे। पुलिस ने बार के कर्मचारियों से पूछताछ की और सीसीटीवी फुटेज की जांच की। फुटेज में विवाद और गोलीबारी की घटना कैद होने की बात सामने आई थी। इसके आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और मुख्य आरोपित समेत 14 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
अब हाई कोर्ट ने अनुसंधान की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए एसएसपी से रिपोर्ट मांगी है। 30 नवंबर तक दाखिल होने वाली रिपोर्ट और अगली सुनवाई में अदालत की टिप्पणियां इस मामले में अहम होंगी।
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