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Kerala Vigilance Probe: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच को मंजूरी

केरल में पीडब्ल्यूडी सचिव रहते सड़क निर्माण के बिल पास कराने के एवज में 2 करोड़ की घूस मांगने का आरोप, मंत्री रमेश चेन्निथला ने दी हरी झंडी

Kerala Vigilance Probe: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केरल सरकार ने सतर्कता जांच शुरू करने की आधिकारिक अनुमति दे दी है। यह पूरा मामला उनके केरल कैडर में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव रहने के दौरान का है। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने पुष्टि की है कि उन्होंने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) को इस मामले में जांच आगे बढ़ाने के लिए औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। कानूनी सलाह मिलने और मुख्यमंत्री के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है।

Kerala Vigilance Probe: पाटी-बेल कंसोर्टियम का विवाद, 2 करोड़ रुपये रिश्वत मांगने का लगा आरोप

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने समाचार एजेंसी को बताया कि ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे हैं। उनके पीडब्ल्यूडी सचिव के कार्यकाल के दौरान तिरुवनंतपुरम से अंगमाली तक जाने वाली ‘मेन सेंट्रल रोड’ परियोजना में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। यह महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के वित्तीय सहयोग से क्रियान्वित की जा रही थी। इस परियोजना के निर्माण का जिम्मा ‘पाटी-बेल’ (PATI-BEL) कंसोर्टियम को सौंपा गया था। यह कंसोर्टियम मलेशिया और केरल की दो निर्माण कंपनियों का संयुक्त समूह था।

मंत्री के अनुसार निर्माण कार्य में कई तकनीकी खामियां थीं। इसी बीच सरकार द्वारा पीडब्ल्यूडी को सौंपे गए बिलों का भुगतान रोक दिया गया। बिल पास न होने के कारण उपजे भारी तनाव में मलेशियाई कंपनी के प्रोजेक्ट ऑफिसर ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया था। मामले में दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इनमें एक याचिका एम. वी. अनूप गोपाल और दूसरी पूर्व ठेकेदार सज्जन कुमार द्वारा दी गई है। याचिका में सज्जन कुमार ने सीधा आरोप लगाया है कि तत्कालीन पीडब्ल्यूडी सचिव ज्ञानेश कुमार ने बिल पास करने के एवज में 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी।

Kerala Vigilance Probe: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत मिली अनुमति

मंत्री रमेश चेन्निथला ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ लोक सेवकों के खिलाफ किसी भी प्रकार की सतर्कता जांच शुरू करने से पहले कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है। ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ (Prevention of Corruption Act) की धारा 17A के तहत राज्य सरकार की पूर्व वैधानिक अनुमति लेना आवश्यक होता है। उन्होंने बताया कि सरकार को इस संबंध में विस्तृत कानूनी राय प्राप्त हुई थी। कानूनी विशेषज्ञों ने अपनी राय में स्पष्ट किया था कि यदि सक्षम प्राधिकारी अनुमति दे, तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा सकती है।

कानूनी राय की गहन समीक्षा करने और मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श के उपरांत मंगलवार शाम विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो को विधिवत जांच की अनुमति दे दी गई। अब ब्यूरो की विशेष टीम इन सभी आरोपों, फाइलों और तत्कालीन लेनदेन के दावों की विस्तृत और तथ्यपरक जांच करेगी।

सियासी घमासान के बीच गरमाया पुराना प्रशासनिक विवाद

यह विवाद ऐसे संवेदनशील समय में दोबारा सतह पर आया है जब देश का राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है। देश भर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर लगातार हमलावर हैं। विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं।

हालांकि, यह पूरी शिकायत विशुद्ध रूप से करीब दो दशक पुराने राज्य के प्रशासनिक कार्यकाल और सड़क परियोजना के भुगतान विवाद से जुड़ी हुई है। इन आरोपों की अभी तक कोई न्यायिक या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब सबकी निगाहें केरल सरकार की सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि इस पुराने मामले में क्या नए तथ्य निकलकर सामने आते हैं।

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