जमशेदपुर में वाराणसी के गंगा घाटों की तर्ज पर बना पूजा पंडाल, 1953 से हो रहा है आयोजन
Kashi Theme पर आधारित सिदगोड़ा का दुर्गा पूजा पंडाल इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना है। जमशेदपुर के सिदगोड़ा में न्यू सिदगोड़ा दुर्गा पूजा एवं काली पूजा कमेटी की ओर से तैयार भव्य पंडाल का बुधवार रात पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उद्घाटन किया। उन्होंने फीता काटकर पूजा पंडाल का शुभारंभ किया। इस बार पंडाल को वाराणसी के गंगा घाटों पर होने वाली दिव्य गंगा आरती की तर्ज पर सजाया गया है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को अपने शहर में ही काशी की धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभूति कराना है।
Kashi Theme पंडाल में दिखेगी बनारस के घाटों की झलक
इस वर्ष पूजा कमेटी ने पंडाल की सजावट में वाराणसी की धार्मिक विरासत को प्रमुखता दी है। काशी विश्वनाथ की नगरी और गंगा आरती की परंपरा से प्रेरित इस पंडाल में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को दर्शाने का प्रयास किया गया है। मां गंगा की महिमा और धार्मिक आस्था को केंद्र में रखकर इसकी परिकल्पना की गई है। पंडाल के जरिए श्रद्धालुओं को बनारस के घाटों जैसा वातावरण उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है। दुर्गा पूजा के दौरान यह थीम स्थानीय लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
रघुवर दास ने की धार्मिक परिकल्पना की सराहना
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि सिदगोड़ा का पूजा पंडाल हिंदू संस्कृति और सनातन परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि काशी में होने वाली गंगा आरती भारतीय धार्मिक आस्था की विशिष्ट पहचान है। ऐसी परिकल्पना को जमशेदपुर में साकार करना सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में सराहनीय पहल है। उनके अनुसार, धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है।
धार्मिक स्थलों के विकास का किया उल्लेख
रघुवर दास ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में धार्मिक स्थलों के विकास के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों के विकास और मंदिरों के आसपास कॉरिडोर निर्माण जैसे कार्यों से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को पहचान मिल रही है। इसी तरह की प्रेरणा से स्थानीय स्तर पर भी धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को विशेष स्वरूप दिया जा सकता है।
1953 से हो रहा है न्यू सिदगोड़ा दुर्गा पूजा का आयोजन
पूजा कमेटी के मुख्य संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह ने बताया कि न्यू सिदगोड़ा दुर्गा पूजा का आयोजन वर्ष 1953 से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कमेटी हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिए कुछ विशेष करने का प्रयास करती है। इस बार वाराणसी के घाटों और गंगा आरती की थीम चुनने के पीछे भी यही सोच रही है। उनका कहना है कि झारखंड के कई सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए वाराणसी जाकर काशी विश्वनाथ के दर्शन करना आसान नहीं होता। ऐसे में जमशेदपुर में ही काशी जैसा धार्मिक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया है।
स्थानीय श्रद्धालुओं को मिलेगी गंगा आरती की अनुभूति
चंद्रगुप्त सिंह के अनुसार, पंडाल के माध्यम से श्रद्धालु मां गंगा की महिमा और गंगा आरती से जुड़ी आध्यात्मिक अनुभूति अपने शहर में प्राप्त कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य केवल आकर्षक सजावट करना नहीं, बल्कि लोगों को धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है। कमेटी चाहती है कि पूजा का यह आयोजन समाज के हर वर्ग के लोगों के लिए सुलभ और यादगार बने। पंडाल की थीम इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
सामाजिक एकता का संदेश देती है दुर्गा पूजा
पूजा कमेटी के मुख्य संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह ने कहा कि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का भी अवसर है। मां दुर्गा की आराधना शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है। ऐसे आयोजन लोगों को एक साथ आने और पारंपरिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं। पूजा पंडालों की अलग-अलग थीम के माध्यम से धार्मिक कथाओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी किया जाता है।
उद्घाटन समारोह में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
न्यू सिदगोड़ा दुर्गा पूजा एवं काली पूजा कमेटी के पंडाल उद्घाटन समारोह में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें टाटा मोटर्स यूनियन के नेता आरके सिंह, राकेश्वर पांडेय, कल्याणी शरण, रामबालक सिंह, रामबाबू तिवारी, अखिलेश चौधरी, शैलेश पांडेय, आईपी सिंह, विकास सिंह, भूपेंद्र सिंह, गायत्री दास, प्रभा दास, शंभूनाथ सिंह, पूर्व सांसद सुमन महतो और समाजसेवी शिवशंकर सिंह सहित अन्य लोग शामिल थे। समारोह के दौरान धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
दुर्गा पूजा में आकर्षण का केंद्र बनेगा सिदगोड़ा का पंडाल
वाराणसी की गंगा आरती से प्रेरित सिदगोड़ा का यह पंडाल जमशेदपुर में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों की स्थानीय पहचान को भी दर्शाता है। काशी की परंपरा को स्थानीय परिवेश में प्रस्तुत करने की इस कोशिश से श्रद्धालुओं को एक अलग अनुभव मिलने की उम्मीद है। वर्ष 1953 से आयोजित हो रही न्यू सिदगोड़ा दुर्गा पूजा की परंपरा में इस बार की थीम ने एक नया आयाम जोड़ा है।
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