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HomeझारखंडJharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास पर दिखाई सख्ती

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Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास पर दिखाई सख्ती

  • गढ़वा डीसी को मजदूरों की सूची सत्यापित कर सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने का निर्देश

Ranchi: Jharkhand High Court ने बंधुआ मजदूरों को मुआवजा, पुनर्वास और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने गढ़वा जिले के उपायुक्त (DC) को प्रार्थी द्वारा उपलब्ध कराई गई बंधुआ मजदूरों की सूची का सत्यापन करने और पात्र लोगों को तत्काल सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दिया निर्देश

मुख्य न्यायाधीश M. S. Sonak और न्यायमूर्ति Rajesh Shankar की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जिन मुक्त बंधुआ मजदूरों को अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, उन्हें बिना देरी राहत उपलब्ध कराई जाए। सरकार की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा।

Jharkhand News: 300 से अधिक मजदूरों के पुनर्वास का मामला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के तहत मुक्त कराए गए 300 से अधिक मजदूरों को अब तक मुआवजा, पुनर्वास और अन्य सरकारी सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम नहीं कर रही है। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि संबंधित लोगों की सूची प्रशासन को उपलब्ध करा दी गई है और सत्यापन प्रक्रिया जारी है।

कोर्ट में पेश हुए गढ़वा डीसी

सुनवाई के दौरान गढ़वा के उपायुक्त कोर्ट के आदेश के अनुपालन में उपस्थित हुए। सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि महाराष्ट्र के सोलापुर से मुक्त कराई गई महिला बंधुआ मजदूरों को वर्ष 2017 में ही आवास, मनरेगा जॉब कार्ड और अन्य सरकारी सुविधाएं प्रदान की जा चुकी हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, भदोही, कानपुर और प्रयागराज से मुक्त कराए गए मजदूरों के दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित जिलों से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर किया जा रहा है।

Jharkhand News: पहले भी जताई थी नाराजगी

पूर्व की सुनवाई में हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि बंधुआ मजदूरों को सरकारी लाभ दिलाने के मामले में सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। अदालत ने सरकार द्वारा दाखिल जवाब को पूरी तरह संतोषजनक नहीं माना था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया जा सका है। इसी कारण वर्तमान और पूर्व उपायुक्त को तलब किया गया था।

Jharkhand News: पुनर्वास और सरकारी योजनाओं पर जोर

अदालत ने स्पष्ट किया कि मुक्त कराए गए मजदूरों को पुनर्वास, आवास, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलना चाहिए ताकि वे दोबारा शोषण का शिकार न हों।

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