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Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हिरासत में मौत और रेप मामलों में न्यायिक जांच अनिवार्य

  • पुलिस और जेल कस्टडी के मामलों में अब ज्यूडिशियल इंक्वायरी होगी, हाईकोर्ट ने जारी किए सख्त निर्देश

Ranchi: Jharkhand High Court ने पुलिस हिरासत, जेल कस्टडी में मौत और रेप के मामलों को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि अब ऐसे सभी मामलों में न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) अनिवार्य होगी। मुख्य न्यायाधीश M. S. Sonak और न्यायमूर्ति Rajesh Shankar की खंडपीठ ने यह आदेश सुनाते हुए कहा कि पहले इन मामलों की जांच एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से कराई जाती थी, लेकिन अब ज्यूडिशियल इंक्वायरी कराना आवश्यक होगा।

Jharkhand High Court: झालसा को SOP तैयार करने का निर्देश

कोर्ट ने अपने आदेश में Jharkhand State Legal Services Authority (झालसा) को निर्देश दिया है कि वह जेल और पुलिस हिरासत में मौत या रेप के मामलों के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की गाइडलाइन के अनुरूप स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करे। अदालत ने कहा कि इससे ऐसे मामलों की जांच प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू हो सकेगी।

250 मामलों पर मांगी रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कई मामलों में अब तक ज्यूडिशियल इंक्वायरी नहीं हुई है। इस पर कोर्ट ने सरकार द्वारा दिए गए करीब 250 मामलों में संबंधित जिला जजों को कारण बताते हुए हाईकोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसके अलावा अदालत ने राज्य सरकार को पुलिस और जेल हिरासत में मौत या रेप से जुड़े मामलों में कई अन्य दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।

Jharkhand High Court: 2018 से 2025 के बीच लगभग 500 मौतें

मामले की सुनवाई के दौरान गृह सचिव द्वारा दाखिल शपथ पत्र में बताया गया कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच राज्य में पुलिस और जेल हिरासत में लगभग 500 मौतें हुई हैं। इनमें से करीब आधे मामलों में न्यायिक जांच नहीं कराई गई। इस पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी थी कि सभी मामलों में न्यायिक जांच क्यों नहीं हुई और क्या एनएचआरसी की गाइडलाइन का पालन किया गया था।

एनएचआरसी गाइडलाइन और BNSS का हवाला

याचिकाकर्ता मोहम्मद मुमताज अंसारी की ओर से अधिवक्ता शादाब अंसारी ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की गाइडलाइन और BNSS की धारा 196(2) का हवाला देते हुए न्यायिक जांच अनिवार्य करने की मांग की थी। याचिका में राज्य में जेल और पुलिस हिरासत में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया था।

Jharkhand High Court: पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

हाईकोर्ट के इस फैसले को मानवाधिकार और न्यायिक पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हिरासत में मौत या रेप जैसे मामलों में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

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