- दो दिवसीय ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन कार्यक्रम “आरंभ 2026” सफलतापूर्वक संपन्न
- विशेषज्ञों ने दिया सफलता का मंत्र- अनुसंधान में धैर्य, समर्पण और अनुशासन ही बनेंगे नवाचार की आधारशिला
जमशेदपुर : झारखंड के प्रमुख शिक्षण संस्थान अरका जैन विश्वविद्यालय में पीएच.डी. शोधार्थियों के लिए आयोजित दो दिवसीसीय ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन कार्यक्रम “आरंभ 2026 (जनवरी बैच)” सोमवार संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य नए शोधार्थियों को विश्वविद्यालय के शोध वातावरण, सुविधाओं, नियमों एवं अनुसंधान नैतिकता से अवगत कराना था। इसमें विशेषज्ञों ने नवनामांकित शोधार्थियों को सफलता का मंत्र दिया। उन्होंने बताया कि अनुसंधान में धैर्य, समर्पण और अनुशासन ही नवाचार की आधारशिला बनेंगे।
शोध में धैर्य और समर्पण अत्यंत आवश्यक : प्रो. सतीश कुमार
कार्यक्रम की शुरुआत विगत 17 अप्रैल को उद्घाटन सत्र के साथ हुई। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जमशेदपुर के प्रोफेसर एवं डीन (रिसर्च एंड कंसल्टेंसी) प्रो. (डॉ ) सतीश कुमार थे। नवनामांकित शोधार्थियों का मामर्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा कि शोध एक निरंतर सीखने की प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य और समर्पण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यदि आप अपने कार्य के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे, तो निश्चित रूप से उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करेंगे।
समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं : प्रो. ईश्वरन अय्यर
विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. (डॉ.) ईश्वरन अय्यर ने कहा कि अरका जैन विश्वविद्यालय शोध को नवाचार और सामाजिक विकास से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। शोधार्थियों को चाहिए कि वे अपने कार्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। यह शोधकार्य का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
अनुशासन व पारदर्शिता ही सफल शोध की आधारशिला : डॉ. अमित श्रीवास्तव
रजिस्ट्रार डॉ. अमित कुमार श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय शोध के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि अनुशासन और पारदर्शिता ही एक सफल शोध की आधारशिला है।
अंतरविषयक शोध आज की आवश्यकता : प्रो. अंगद तिवारी
प्रो-वाइस चांसलर प्रो. डॉ. अंगद तिवारी ने कहा कि शोधार्थियों को नए विचारों और नवाचारों के प्रति सदैव खुला रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा अंतरविषयक शोध आज के समय की आवश्यकता है।
शोध समाज के लिए योगदान का माध्यम : प्रो. एसएस रजी
बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के चेयरपर्सन प्रो. डॉ. एसएस रजी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शोध केवल अकादमिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के लिए योगदान का माध्यम है। उच्च गुणवत्ता वाला शोध ही राष्ट्र निर्माण में सहायक होता है।
शोधार्थियों को हर संभव मार्गदर्शन व सहयोग : प्रो. सोनिया रियात
शोध विभागाध्यक्ष डॉ. सोनिया रियात ने कहा कि यह कार्यक्रम शोधार्थियों को एक मजबूत आधार प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। हम शोधार्थियों को हर संभव मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करेंगे। कार्यक्रम के दौरान मानव मूल्य, आचार संहिता, शोध नैतिकता, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), ईआरपी, आंतरिक शिकायत समिति (ICC), तथा विश्वविद्यालय की पुस्तकालय सुविधाओं पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। साथ ही पीएच.डी. कार्यक्रम की प्रक्रिया, कोर्सवर्क कक्षाओं एवं विश्वविद्यालय के नियमों की जानकारी भी शोधार्थियों के साथ साझा की गई। दो दिवसीय यह कार्यक्रम धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ। सभी शोधार्थियों ने इस कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी, संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक बताया।



