डिस्चार्ज पिटीशन खारिज करने के पीएमएलए कोर्ट के फैसले पर मुहर, चलेगा मुकदमा
Jharkhand High Court: रांची के बहुचर्चित बड़गांई 8.86 एकड़ जमीन घोटाले में आरोपी आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह को झारखंड उच्च न्यायालय से करारा झटका लगा है। उच्च न्यायालय ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। विनोद कुमार सिंह ने रांची की विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा अपनी डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने विनोद कुमार सिंह की याचिका को आधारहीन पाते हुए निरस्त कर दिया। अदालत के इस सख्त आदेश के बाद अब विनोद कुमार सिंह को मनी लॉन्ड्रिंग के इस गंभीर मामले में नियमित अदालती ट्रायल का सामना करना पड़ेगा।
Jharkhand High Court में ईडी के वकीलों ने मजबूती से रखा पक्ष
झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरव कुमार ने पक्ष रखा। ईडी के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि बड़गांई अंचल की 8.86 एकड़ जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त और दस्तावेजों की जालसाजी में विनोद कुमार सिंह की संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण हैं। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि विशेष पीएमएलए कोर्ट ने सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद ही डिस्चार्ज याचिका खारिज की थी। ईडी के तर्कों से सहमत होते हुए उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया।
Jharkhand High Court से पहले विशेष पीएमएलए अदालत ने तय किए थे आरोप
इससे पहले रांची स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत ने आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह की डिस्चार्ज पिटीशन को सिरे से खारिज कर दिया था। विशेष अदालत ने पाया था कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त दस्तावेजी आधार मौजूद हैं। इसके बाद विशेष अदालत ने विनोद कुमार सिंह के खिलाफ विधिवत आरोप भी गठित कर दिए थे। आरोप गठन के खिलाफ और खुद को केस से बरी कराने के उद्देश्य से विनोद कुमार सिंह ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन उच्च न्यायालय से भी राहत नहीं मिलने से उनकी कानूनी मुश्किलें अब काफी बढ़ गई हैं।
ईडी की जांच में जेएमएम नेता अंतू तिर्की समेत 17 आरोपियों पर चार्जशीट
उल्लेखनीय है कि राजधानी रांची के बड़गांई स्थित 8.86 एकड़ जमीन के कथित फर्जीवाड़े को लेकर ईडी ने व्यापक जांच अभियान चलाया था। इस दौरान जांच एजेंसी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के वरिष्ठ नेता अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह समेत कई बड़े जमीन कारोबारियों और बिचौलियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। छापेमारी में कई फर्जी डीड, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए थे। ईडी ने मामले की जांच पूरी करते हुए सभी मुख्य आरोपियों के खिलाफ विशेष पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
सभी 17 आरोपियों पर आरोप तय, ट्रायल की प्रक्रिया तेज
रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए अंतू तिर्की और आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह समेत कुल 17 आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय कर दिए हैं। इस मामले में जमीन के मूल कागजातों में हेराफेरी, अंचल कार्यालय के सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और अवैध तरीके से करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जा करने के आरोप हैं। उच्च न्यायालय द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के बाद अब विशेष अदालत में गवाहों के बयान और साक्ष्य पेश करने की ट्रायल प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।
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