Jamshedpur Jugsalai Water Crisis : झारखंड के जमशेदपुर स्थित जुगसलाई क्षेत्र में पेयजल संकट (Water Crisis) की विकराल स्थिति ने मंगलवार को उग्र रूप ले लिया। लंबे समय से पानी की किल्लत से जूझ रहे स्थानीय नागरिकों के धैर्य का बांध आखिरकार टूट गया और उन्होंने बड़ी संख्या में नगर विकास एवं आवास विभाग (Urban Development and Housing Department) के अधीन संचालित जुगसलाई नगर परिषद (Jugsalai Municipal Council) कार्यालय का घेराव किया। इस प्रदर्शन में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने अपनी खाली बाल्टियों के साथ प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी के दस्तक देते ही जलापूर्ति की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
दो दशकों का इंतजार और चुनावी वादों की हकीकत
प्रदर्शनकारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि जुगसलाई इलाके में पानी की समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले लगभग दो दशकों से यहाँ के लोग इस संकट को झेल रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने हालिया नगर निकाय चुनाव के समय किए गए वादों को भी याद दिलाया। स्थानीय लोगों ने बताया कि नवनिर्वाचित चेयरमैन नौशीन खान ने चुनाव प्रचार के दौरान जलापूर्ति की समस्या को अपनी शीर्ष प्राथमिकता बताते हुए इसके त्वरित समाधान का आश्वासन दिया था। हालांकि, जीत के बाद भी जमीनी हालात में कोई उल्लेखनीय सुधार न होने से मतदाताओं में गहरी निराशा और नाराजगी देखी जा रही है।
गर्मी के साथ बढ़ी दुश्वारियां, पर्याप्त सप्लाई का अभाव
स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र के कई मोहल्लों में नलों से पानी आना लगभग बंद हो गया है और जहाँ सप्लाई हो भी रही है, वह ऊँट के मुँह में जीरा के समान है। गर्मी बढ़ने के साथ ही जल स्तर नीचे गिर गया है, जिससे मोहल्लों में लगे चापाकल भी जवाब दे रहे हैं। महिलाओं को घर का कामकाज छोड़कर दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक परेशानियां बढ़ गई हैं। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद प्रशासन स्थिति की गंभीरता को समझने में पूरी तरह विफल रहा है।
डीप बोरिंग की घोषणा बनाम तत्काल राहत की मांग
नगर परिषद प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान आक्रोश को शांत करने के लिए करीब 20 स्थानों पर डीप बोरिंग कराने की भविष्य की योजना का हवाला दिया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी इस घोषणा से संतुष्ट नजर नहीं आए। उनका तर्क है कि डीप बोरिंग एक दीर्घकालिक योजना है, जबकि उन्हें आज प्यास बुझाने के लिए पानी की सख्त जरूरत है। लोगों ने मांग की कि जब तक पाइपलाइन या अन्य स्थायी स्रोतों से जलापूर्ति बहाल नहीं होती, तब तक प्रशासन को प्रभावित मोहल्लों में नियमित रूप से पानी के टैंकर भेजने चाहिए ताकि जनता को तत्काल राहत मिल सके।
जल्द समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के अंत में लोगों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे अब और अधिक इंतजार करने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर जलापूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और नियमित टैंकर सेवा शुरू नहीं की गई, तो वे नगर परिषद कार्यालय में तालाबंदी करेंगे और उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से अपील की कि वे कागजी योजनाओं के बजाय धरातल पर उतरकर राहत कार्य संचालित करें, ताकि आम जनता को इस बुनियादी समस्या से निजात मिल सके।
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