राघोपुर में गंगा के तेज कटाव से ढहा बांध, नवगछिया एसपी और एसडीएम ने संभाला मोर्चा
Bhagalpur Ganga Erosion: भागलपुर के खरीक प्रखंड में बड़ा हादसा हुआ। गंगा नदी के भीषण कटाव से रेलवे बांध ढह गया। शुक्रवार देर रात 300 मीटर बांध नदी में समाया। राघोपुर में ब्रह्म बाबा स्थान के पास तटबंध टूटा। अचानक मिट्टी धंसने से गांवों में हड़कंप मच गया। लोग आधी रात को घर छोड़कर भागने लगे। कई मकान और झोपड़ियां नदी में विलीन हो गईं। रेल परिचालन पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बांध धंसने के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई।
Bhagalpur Ganga Erosion: ताश के पत्तों की तरह ढहा तटबंध
कटाव की रफ्तार बहुत ज्यादा तेज थी। हनुमान मंदिर से ब्रह्म बाबा स्थान तक बांध ध्वस्त हुआ। करीब 300 मीटर का दायरा पूरी तरह कट गया। नदी की तेज धारा सीधे रेलवे लाइन से टकरा रही। इससे शंकरपुर और अलालपुर गांव में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर शरण ली है। कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। कटाव की भयावह आवाज सुनकर लोग सहम उठे। ग्रामीणों ने आंखों के सामने आशियाने उजड़ते देखे। लोग जरूरी सामान लेकर ऊंचे बांध की ओर भागे।
Bhagalpur Ganga Erosion: नवगछिया एसपी और एसडीएम पहुंचे मौके पर
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। नवगछिया के एसपी वैभव शर्मा रात में ही पहुंचे। उनके साथ एसडीएम के. परीक्षित भी दलबल संग आए। दोनों अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का जायजा लिया। जोखिम वाले इलाकों से ग्रामीणों को तुरंत सुरक्षित निकाला गया। जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर कैंप कर रही। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के अधिकारी भी डटे हुए हैं। मुख्य अभियंता की देखरेख में फ्लड फाइटिंग शुरू हुई। बचे हुए बांध को बचाने का कार्य युद्धस्तर पर है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
रेलवे लाइन पर मंडराया कटाव का गंभीर संकट
बांध टूटने से रेलवे ट्रैक पर खतरा बढ़ गया है। गंगा का पानी रेलवे लाइन की बुनियाद से टकरा रहा। रेलवे के तकनीकी अधिकारी भी स्थिति पर नजर रख रहे। एहतियात के तौर पर ट्रेनों की गति धीमी हो सकती। यदि कटाव और बढ़ा तो बड़ा नुकसान हो सकता है। प्रशासन ने रेलवे अधिकारियों को हर पल की सूचना दी। ट्रैक की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पत्थर गिराए जा रहे। इंजीनियरों का दल स्थिति को थामने की कोशिश में जुटा। ट्रैक की निरंतर पेट्रोलिंग कराई जा रही है।
मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र के इस्तीफे के वादे पर गरमाई राजनीति
तटबंध ध्वस्त होने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। कार्य की घटिया गुणवत्ता को लेकर पहले आवाज उठी थी। सरपंच प्रमोद मंडल ने 4 सितंबर को अनशन किया था। उस दौरान मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने आश्वासन दिया था। उन्होंने दावा किया था कि बांध टूटने पर इस्तीफा देंगे। अब ग्रामीण मंत्री का पुराना वादा याद दिला रहे हैं। पूरे इलाके में मंत्री के इस्तीफे की चर्चा छिड़ी। लोग जल संसाधन विभाग के अफसरों पर सवाल उठा रहे। ग्रामीणों ने लापरवाही की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
राहत और बचाव कार्य में जुटी प्रशासन की टीम
विस्थापित ग्रामीणों के लिए राहत कार्य शुरू कर दिए गए। प्रशासन ने प्रभावितों के रहने और खाने का प्रबंध किया। कटाव पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी दवाइयों के साथ तैनात हैं। अधिकारियों ने कहा कि जानमाल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बालू भरी बोरियां डालकर धारा मोड़ने का प्रयास जारी है। पूरा प्रशासनिक अमला हालात सामान्य करने में जुटा है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी पीड़ितों की मदद कर रहे हैं।
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