13 साल की लंबी लड़ाई के बाद अधिवक्ता जय प्रकाश को मिला हक, पीपी पद के मिलेंगे सारे लाभ
Jharkhand PP Case: झारखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) से बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार अपने ही सरकारी वकील से केस हार गई। यह मामला लोक अभियोजक के पद से जुड़ा है। अदालत ने सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी। यह कानूनी लड़ाई पूरे 13 साल तक चली। अंत में पूर्व अभियोजक जय प्रकाश को न्याय मिला। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। अब उन्हें पीपी पद का वेतन और लाभ मिलेगा।
Jharkhand PP Case: 1984 में बिहार के समय हुई थी नियुक्ति
जय प्रकाश की नियुक्ति 1984 में हुई थी। तब एकीकृत बिहार का दौर था। वे सहायक लोक अभियोजक पद पर बहाल हुए। राज्य बंटवारे के बाद उन्हें झारखंड कैडर मिला। शुरुआत में उन्हें सरायकेला में तैनाती मिली। वर्ष 2008 में उनका जमशेदपुर तबादला हुआ। जमशेदपुर सिविल कोर्ट में उन्हें नई जिम्मेदारी मिली। वे जिला अदालत के प्रभारी लोक अभियोजक बनाए गए। वे पूरी निष्ठा से काम करते रहे।
Jharkhand PP Case: 11 मार्च 2008 के आदेश में लगी थी शर्त
सरकार ने 11 मार्च 2008 को आदेश जारी किया। इस आदेश में एक अनुचित शर्त जोड़ी गई। लिखा गया कि वे सीनियर पद का दावा नहीं करेंगे। न ही वे बढ़े हुए वेतन की मांग करेंगे। इसके बाद उन्हें अपर लोक अभियोजक बनाया गया। वे 28 फरवरी 2014 को सेवानिवृत्त हुए। रिटायरमेंट से पहले उन्होंने अपना वाजिब हक मांगा। उन्होंने प्रभारी पीपी पद का वेतन मांगा। लेकिन सरकार ने उनकी मांग ठुकरा दी।
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2013 में हाईकोर्ट पहुंचे थे जय प्रकाश
सरकार के इनकार के बाद वे हाईकोर्ट चले गए। उन्होंने वर्ष 2013 में रिट याचिका दाखिल की। उन्होंने 2008 के सरकारी आदेश की शर्त को चुनौती दी। उन्होंने वरिष्ठ पद के सभी वित्तीय लाभ मांगे। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अदालत ने सरकार की मनमानी शर्त को गलत पाया। कोर्ट ने जय प्रकाश के पक्ष में फैसला सुनाया। उन्हें पीपी पद का पूरा वेतन देने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। अक्टूबर 2026 में मामले पर अंतिम सुनवाई हुई। न्यायाधीश एजी मसीह की पीठ ने सुनवाई की। साथ ही न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल भी पीठ में शामिल थीं। शीर्ष अदालत ने सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, काम लिया तो वेतन दें। पद की जिम्मेदारी दी तो लाभ से नहीं रोक सकते। इसके साथ ही सरकार की एसएलपी खारिज हो गई।
13 साल के संघर्ष के बाद मिला पूरा सम्मान
इस फैसले से न्यायिक अधिकारियों में खुशी की लहर है। जय प्रकाश ने 13 साल तक धैर्य से लड़ाई लड़ी। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से न्याय की जीत हुई। अब सरकार को बकाए का पूरा भुगतान करना होगा। पेंशन और ग्रेच्युटी में भी बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा। यह फैसला अन्य कर्मचारियों के लिए नजीर बन गया। मनमानी शर्तों पर अदालतों ने कड़ा प्रहार किया।
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