JPSC Recruitment Scam | झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े कथित नियुक्ति घोटाले की जांच में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को रांची समेत विभिन्न इलाकों में चलाए गए अभियान के दौरान सात लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें रांची से धर्मेंद्र कुमार नामक व्यक्ति भी शामिल है। जांच के दौरान उसके पास से तीन मोबाइल फोन और एक कंप्यूटर जब्त किया गया है। सूत्रों के अनुसार, इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच के बाद मामले में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
JPSC Recruitment Scam: रांची से धर्मेंद्र कुमार हिरासत में
सूत्रों के मुताबिक धर्मेंद्र कुमार को रांची के कचहरी क्षेत्र के समीप स्थित एक अतिसंवेदनशील इलाके से सीआईडी ने हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि वह एक वरिष्ठ अधिकारी के आवासीय कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत था। प्रारंभिक जांच में उसके कथित तौर पर नियुक्ति घोटाले से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क में होने की जानकारी मिलने के बाद सीआईडी ने कार्रवाई की। हालांकि एजेंसी की ओर से अभी तक उसकी भूमिका को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
JPSC Recruitment Scam | कई इलाकों में एक साथ कार्रवाई
जांच एजेंसी ने रांची के अलावा जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र से भी दो लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं चार अन्य व्यक्तियों को शहर के अलग-अलग इलाकों से पूछताछ के लिए उठाया गया है। सभी से सीआईडी मुख्यालय में पूछताछ की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि जब्त मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच से कथित नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं।
डिजिटल साक्ष्यों पर जांच का फोकस
सीआईडी की जांच फिलहाल इलेक्ट्रॉनिक डाटा, कॉल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और डिजिटल संचार के विश्लेषण पर केंद्रित है। हाल के दिनों में जांच एजेंसी ने जेपीएससी परीक्षा से जुड़े कई अधिकारियों, निजी एजेंसियों के कर्मचारियों और अन्य संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की है। इसी कड़ी में नए संदिग्धों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि फोरेंसिक विश्लेषण और पूछताछ के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है। हालांकि सीआईडी ने फिलहाल इस मामले में किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया है और जांच जारी रहने की बात कही है। आधिकारिक पुष्टि के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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