- गुवा में प्रबंधन और संयुक्त यूनियनों के बीच कई दौर की बातचीत बेनतीजा, हजारों श्रमिकों ने बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने से किया इनकार
Jharkhand: पश्चिमी सिंहभूम जिले की सेल (SAIL) संचालित लौह अयस्क खदानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने को लेकर प्रबंधन और संयुक्त मजदूर यूनियनों के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोमवार को गुवा स्थित एचआरडी कार्यालय में दोनों पक्षों के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। अंततः बातचीत विफल होने के बाद संयुक्त यूनियनों के प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया, जिससे विवाद और अधिक गंभीर हो गया है।
बैठक में शामिल हुए प्रशासनिक अधिकारी
वार्ता में सेल प्रबंधन की ओर से सीजीएम चंद्रभूषण कुमार, महाप्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह और अर्णव डे मौजूद रहे। वहीं प्रशासन की ओर से किरीबुरू के एसडीपीओ विनीत कुमार किंडो और गुवा थाना प्रभारी नीतीश कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान एसडीपीओ ने दोनों पक्षों से न्यायालयीय प्रक्रिया का सम्मान करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
Jharkhand News: यूनियनों ने उठाया मुख्य श्रम आयुक्त का मुद्दा
संयुक्त यूनियनों ने स्पष्ट किया कि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का मामला वर्तमान में मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष विचाराधीन है। यूनियन नेताओं का कहना है कि जब तक इस मामले पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वर्षों से चली आ रही पारंपरिक उपस्थिति व्यवस्था को जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने श्रमिक संगठनों की सहमति के बिना पुरानी पंचिंग कार्ड प्रणाली समाप्त कर नई व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया है, जिसे कर्मचारी स्वीकार नहीं करेंगे।
हजारों श्रमिकों ने बायोमेट्रिक हाजिरी से किया इंकार
सोमवार की पहली पाली से किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया खदानों में कार्यरत हजारों श्रमिकों ने बायोमेट्रिक मशीनों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने से इनकार कर दिया। इसके चलते कई खदानों में उत्पादन कार्य प्रभावित हुआ। साथ ही लौह अयस्क की लोडिंग और परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ा।श्रमिक संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, तब तक वे बायोमेट्रिक प्रणाली का विरोध जारी रखेंगे।
Jharkhand News: आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियनों ने प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कर्मचारियों पर जबरन बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का प्रयास किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल हाजिरी का मुद्दा नहीं, बल्कि श्रमिक अधिकारों और श्रम कानूनों के पालन से जुड़ा विषय है।
अब मुख्य श्रम आयुक्त और न्यायालय के फैसले पर नजर
फिलहाल प्रबंधन और यूनियन दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं। बातचीत विफल होने के बाद समाधान की संभावनाएं फिलहाल दूर नज़र आ रही हैं। अब सभी की निगाहें मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) और न्यायालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे इस विवाद का भविष्य तय होगा।
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