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HomeझारखंडJharkhand Mines Department: लघु खनिजों पर भारी दंड से भड़के ठेकेदार

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Jharkhand Mines Department: लघु खनिजों पर भारी दंड से भड़के ठेकेदार

नियमावली में नए संशोधन के विरोध में आर-पार का ऐलान, सभी डीसी को सौंपेंगे ज्ञापन

Jharkhand Mines Department: झारखंड सरकार द्वारा निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिजों पर कड़े दंड के प्रावधान लागू करने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकारी निर्माण में लघु खनिजों का वैध चालान नहीं देने पर ठेकेदारों पर भारी जुर्माना लगाने के फैसले से राज्य भर के ठेकेदार संगठनों में तीव्र आक्रोश है। नाराज संवेदकों ने सरकार के इस कदम के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया है। आंदोलन के पहले चरण में राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को मांग पत्र सौंपा जाएगा। उपायुक्तों के स्तर पर मिलने वाले रुख के बाद आगे की उग्र रणनीति तय की जाएगी। खान विभाग के इस आदेश से विकास कार्य फिर से प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

Jharkhand Mines Department ने महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट के बाद बदले नियम

इस पूरे विवाद की जड़ में महालेखाकार (एजी) की एक हालिया ऑडिट रिपोर्ट है। महालेखाकार ने सरकारी निर्माण कार्यों के दौरान वसूली जाने वाली रॉयल्टी की व्यापक जांच की थी। ऑडिट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि सरकारी निर्माण में इस्तेमाल लघु खनिजों से मिलने वाले राजस्व में बिना चालान वाले खनिजों का हिस्सा ज्यादा था। महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट आशंका जताई कि इस ढिलाई से राज्य में अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है। इस गंभीर रिपोर्ट के सामने आने के बाद खान विभाग हरकत में आया। विभाग ने झारखंड लघु खनिज समानुदान नियमावली में कड़ा संशोधन कर ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई के नए आदेश जारी कर दिए। इससे संवेदक संगठनों में रोष फैल गया।

Jharkhand Mines Department के 27 अप्रैल के आदेश से ठप हुए थे निर्माण कार्य

इससे पहले खान विभाग ने 27 अप्रैल 2026 को एक सख्त अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना में स्पष्ट कहा गया था कि जब तक ठेकेदार लघु खनिजों का वैध खनन चालान प्रस्तुत नहीं करेंगे, तब तक उनके बिलों का भुगतान नहीं होगा। सरकार के इस फरमान से पूरे राज्य में जारी पुल-पुलिया, सड़क और भवन निर्माण के कार्य अचानक ठप पड़ गए थे। ठेकेदारों के भुगतान अटकने से भारी संकट खड़ा हो गया था। इसके बाद विभिन्न ठेकेदार संगठनों ने सरकार के उच्चाधिकारियों से मुलाकात की थी। संवेदकों ने 2017 से चली आ रही पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की पुरजोर मांग की थी। इसके बाद ही सरकार ने पिछले बकायों पर राहत दी थी।

वर्ष 2017 में लागू हुई थी दो गुना रॉयल्टी की पुरानी व्यवस्था

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में झारखंड सरकार ने लघु खनिज समानुदान नियमावली में संशोधन किया था। उस समय सरकारी कार्यों में बालू, गिट्टी और पत्थर जैसे लघु खनिजों के इस्तेमाल पर वैध चालान जमा करना आवश्यक किया गया था। लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए एक लचीला विकल्प भी दिया गया था। नियम में प्रावधान था कि यदि कोई संवेदक किसी कारणवश वैध चालान देने में असमर्थ रहता है, तो वह संबंधित खनिज की दर पर दो गुना रॉयल्टी चुकाकर अपना बिल पास करा सकता था। यह व्यवस्था कई वर्षों तक निर्बाध रूप से चलती रही। 27 अप्रैल 2026 से पहले तक के मामलों में सरकार ने बकाए का भुगतान इसी दो गुना रॉयल्टी की दर पर करने की छूट दी है।

नए नियमों में खनिज मूल्य का दोगुना और मिट्टी पर 10 गुना तक भारी जुर्माना

ठेकेदारों के गुस्से का मुख्य कारण 27 अप्रैल 2026 के बाद लागू किए गए नए दंडात्मक नियम हैं। नए नियमों के अनुसार अब बिना चालान के लघु खनिज इस्तेमाल करने पर सिर्फ सामान्य रॉयल्टी से काम नहीं चलेगा। संवेदक को रॉयल्टी के साथ-साथ खनिज के बाजार मूल्य का दो गुना जुर्माना भरना पड़ेगा। इसके अलावा सड़क और तटबंध निर्माण में काम आने वाली मिट्टी के अवैध खनन तथा परिवहन पर रॉयल्टी का 10 गुना तक भारी दंड तय कर दिया गया है। ठेकेदारों का कहना है कि राज्य में कई खनन पट्टे बंद पड़े हैं और वैध चालान आसानी से नहीं मिलते। ऐसे में इतना भारी जुर्माना थोपना सरकारी निर्माण को पूरी तरह बंद करने जैसा है।

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