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Tata Steel Sports: टाटा स्टील की पहल से निखर रहीं खेल प्रतिभाएं

 अकादमियों से मिल रहा खिलाड़ियों को नया मंच

Tata Steel Sports की पहल से झारखंड समेत देश के कई हिस्सों में उभरती खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। टाटा स्टील लंबे समय से खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण केंद्रों, खेल अकादमियों और आधुनिक सुविधाओं पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य प्रतिभाशाली युवाओं को शुरुआती स्तर से तैयार करना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने में मदद करना है। कंपनी की खेल गतिविधियों में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल और स्पोर्ट क्लाइंबिंग जैसी विधाएं शामिल हैं।

Tata Steel Sports: तीरंदाजी में अकादमी की बड़ी उपलब्धियां

जमशेदपुर के जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में वर्ष 1996 में स्थापित टाटा आर्चरी अकादमी इस अभियान की प्रमुख कड़ी है। अकादमी ने कई ऐसे तीरंदाज तैयार किए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। टाटा स्टील के अनुसार, अकादमी से जुड़े खिलाड़ियों में नौ ओलंपियन और नौ अर्जुन पुरस्कार विजेता शामिल हैं। इसके अलावा, यहां प्रशिक्षित 150 से अधिक तीरंदाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं।

दीपिका कुमारी, जयंत तालुकदार और अतनु दास जैसे खिलाड़ियों की उपलब्धियां भारतीय तीरंदाजी में अकादमी के योगदान को दर्शाती हैं। इन खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से देश को पहचान दिलाई है। अकादमी की कार्यप्रणाली में प्रतिभा की पहचान, नियमित अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी पर जोर दिया जाता है। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

Tata Steel Sports: अंकिता भकत की उपलब्धि से बढ़ा उत्साह

अकादमी से जुड़ी तीरंदाज अंकिता भकत ने वर्ष 2026 के एशियाई खेलों में भारतीय महिला रिकर्व टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतकर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। भारतीय टीम में अंकिता के साथ कुमकुम अनिल मोहोड और कीर्ति शामिल थीं। टीम ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को हराकर इस स्पर्धा में भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया। यह उपलब्धि देश में तीरंदाजी की संभावनाओं को मजबूत करती है।

इस तरह की सफलताएं युवा खिलाड़ियों को खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही, यह भी बताती हैं कि लगातार प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं मिलने पर भारतीय खिलाड़ी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। जमशेदपुर में विकसित खेल ढांचा इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है।

स्पोर्ट क्लाइंबिंग में भी आगे बढ़ रहे युवा

टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (टीएसएएफ) के माध्यम से स्पोर्ट क्लाइंबिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस खेल में खिलाड़ी निर्धारित दीवार पर तेजी से चढ़ने या तकनीकी चुनौती पूरी करने का प्रयास करते हैं। टाटा समूह की ओर से प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, टीएसएएफ ने जमशेदपुर और ओडिशा में 16 जमीनी प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए हैं। इन केंद्रों में बच्चों को शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण दिया जाता है। अकादमी में आगे के प्रशिक्षण के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन भी किया जाता है।

स्पोर्ट क्लाइंबिंग में जोगा पूर्ति और दीपु मल्लेश ने भी एशियाई खेलों में भारतीय दल का हिस्सा बनकर ध्यान खींचा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दीपु मल्लेश ने स्पीड क्लाइंबिंग में 5.09 सेकंड का समय दर्ज किया, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। जोगा पूर्ति ने भी 7.28 सेकंड का समय दर्ज किया। इन प्रदर्शनों ने भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता को सामने रखा। जोगा पूर्ति की उपलब्धि आदिवासी समुदाय के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है।

प्रशिक्षण के साथ खेल विज्ञान पर जोर

खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए केवल मैदान या अभ्यास स्थल उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। शारीरिक क्षमता, सही पोषण, चोट से बचाव और मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी हैं। टाटा स्टील की खेल व्यवस्था में आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं के साथ खेल विज्ञान और खिलाड़ियों के समग्र विकास पर ध्यान देने की बात कही गई है। जमशेदपुर का जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विभिन्न खेलों के प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का प्रमुख केंद्र है।

खेलों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने से खिलाड़ियों को अपनी कमजोरियों को समझने और प्रदर्शन में सुधार करने में मदद मिलती है। फिजियोथेरेपी और चोट से उबरने की उचित प्रक्रिया खिलाड़ियों को लंबे समय तक खेल से जुड़े रहने में सहायक होती है। इसी तरह, संतुलित आहार और मानसिक तैयारी बड़े मुकाबलों के दबाव से निपटने में मदद करते हैं।

स्थानीय प्रतिभाओं को मिल रहे हैं बड़े अवसर

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन से स्थानीय खिलाड़ियों को अनुभवी खिलाड़ियों का प्रदर्शन देखने और खेल के नए मानकों को समझने का अवसर मिलता है। जमशेदपुर में स्पोर्ट क्लाइंबिंग से जुड़े आयोजनों ने भी इस खेल के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ाने में योगदान दिया है। टाटा स्टील की खेल अकादमियां और प्रशिक्षण केंद्र प्रतिभा तलाशने से लेकर खिलाड़ियों को आगे की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने तक की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

खेलों में लगातार निवेश और प्रशिक्षण के अवसरों का विस्तार भारतीय खिलाड़ियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के लिए खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास भी जरूरी हैं। टाटा स्टील की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे झारखंड और अन्य क्षेत्रों के युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने, उसे निखारने और देश का प्रतिनिधित्व करने की राह मिल रही है।

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