उपेंद्र पाठक के विचार-संकलन को बताया युवा पीढ़ी के लिए उपयोगी, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक चिंतन पर दिया जोर
Sanchit Vichar: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उपेंद्र पाठक द्वारा संकलित पुस्तक ‘संचित विचार’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक युवा पीढ़ी के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। खासकर नैतिक जीवन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने में इसकी अहम भूमिका हो सकती है। राज्यपाल ने कहा कि अच्छी किताबें समाज को सही दिशा देने के साथ एक बेहतर समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
Sanchit Vichar: अच्छे विचारों से बनता है बेहतर समाज
पुस्तक के विमोचन के दौरान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विचारों और साहित्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुस्तकों के माध्यम से लोगों को जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिलता है। अच्छी पुस्तकें व्यक्ति के चिंतन को व्यापक बनाती हैं। साथ ही उसके व्यवहार और जीवन मूल्यों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘संचित विचार’ का संकलन पाठकों को नैतिकता, सकारात्मक दृष्टिकोण और बेहतर जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करेगा। आज के समय में युवा पीढ़ी के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। ऐसे में प्रेरक साहित्य और श्रेष्ठ विचार उन्हें जीवन में सही दिशा चुनने में मदद कर सकते हैं।
Sanchit Vichar: उपेंद्र पाठक ने विचारों की निरंतरता को बताया महत्वपूर्ण
पुस्तक के संकलक उपेंद्र पाठक ने विमोचन के लिए राज्यपाल के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि विचार कभी समाप्त नहीं होते। वे समय के साथ आगे बढ़ते हैं और नई पीढ़ी को नई दिशा देते रहते हैं। श्रेष्ठ विचार केवल पढ़ने तक सीमित नहीं रहते। वे व्यक्ति के जीवन और उसके दृष्टिकोण को भी प्रभावित करते हैं।
उपेंद्र पाठक ने आशा जताई कि ‘संचित विचार’ युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का माध्यम बनेगी। उनके अनुसार, अच्छे विचार व्यक्ति के जीवन को दिशा देते हैं। साथ ही समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव तैयार करते हैं। इस संकलन के जरिए पाठकों तक ऐसे विचार पहुंचाने का प्रयास किया गया है, जो उन्हें आत्मचिंतन और बेहतर जीवन की ओर प्रेरित कर सकें।
अध्ययन और आध्यात्मिक चिंतन से तैयार हुआ संकलन
‘संचित विचार’ उपेंद्र पाठक के लंबे अध्ययन, चिंतन और जीवनानुभव का परिणाम है। उन्हें प्रेरणादायी साहित्य पढ़ने और विचारों को संकलित करने में विशेष रुचि रही है। वर्षों के दौरान उन्होंने विभिन्न ग्रंथों, महापुरुषों के विचारों और प्रेरक वचनों को संग्रहित किया। इसी सामग्री को व्यवस्थित रूप देकर पुस्तक का स्वरूप दिया गया है।
इस संकलन का उद्देश्य पाठकों में सकारात्मक चिंतन को बढ़ावा देना है। इसके साथ नैतिक मूल्यों और आत्मिक उन्नति के प्रति रुचि विकसित करना भी इसकी प्रमुख भावना है। पुस्तक सामाजिक और आध्यात्मिक सरोकारों से जुड़ी है। इसमें संकलित विचारों के माध्यम से जीवन को बेहतर बनाने और समाज के प्रति जिम्मेदारी समझने का संदेश देने का प्रयास किया गया है।
जनसेवा और सामाजिक दायित्वों से जुड़ा रहा उपेंद्र पाठक का जीवन
उपेंद्र पाठक का जीवन जनसेवा, सामाजिक जिम्मेदारियों और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ा रहा है। उन्होंने लंबे समय तक मत्स्य विभाग में अपनी सेवाएं दीं। संयुक्त बिहार के समय वे बिहार मत्स्य कर्मचारी संघ के महासचिव भी रहे। विभाग में दीर्घकाल तक कार्य करने के बाद वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी सामाजिक गतिविधियां जारी रहीं। उन्होंने समाज और धर्म के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। रांची के साकेत विहार स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर से भी उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा है। वे मंदिर के अध्यक्ष के रूप में दीर्घकाल तक सेवा करते रहे। वर्तमान में वे मंदिर के संरक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
उनकी साहित्यिक रुचि और सामाजिक अनुभव का प्रभाव ‘संचित विचार’ के उद्देश्य में भी दिखाई देता है। इस पुस्तक के माध्यम से वे अध्ययन और जीवन से अर्जित प्रेरक विचारों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।
विमोचन समारोह में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
पुस्तक के विमोचन समारोह में जाने-माने चिकित्सक डॉ. एच. पी. नारायण भी उपस्थित रहे। इसके अलावा अरविंद कुमार, रंजय ओझा, अशोक कुमार राय, सुधांशु पाठक, संध्या पाठक, नीलम पाठक, वेदांत कौस्तव और तेजस कुमार ने कार्यक्रम में भाग लिया।
समारोह में पुस्तक के उद्देश्य और समाज में प्रेरक साहित्य की उपयोगिता को रेखांकित किया गया। ‘संचित विचार’ के जरिए नैतिक मूल्यों, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक चिंतन को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई गई। यह संकलन पाठकों को जीवन के अनुभवों से सीखने और अपने विचारों को बेहतर बनाने की प्रेरणा देने का प्रयास है।
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