जियो कर्मचारी और दो पॉश एजेंट धराए, फर्जी केवाईसी से साइबर ठगों को बेचते थे सिम
Jamshedpur Cyber Police: पूर्वी सिंहभूम जिले की पुलिस ने संगठित साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने साइबर ठगों को अवैध तरीके से सिम कार्ड मुहैया कराने वाले एक बड़े रैकेट को बेनकाब किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में दो प्वाइंट ऑफ सेल यानी पीओएस एजेंट हैं। वहीं एक आरोपी दूरसंचार सेवा प्रदाता रिलायंस जियो कंपनी का कर्मचारी है। पुलिस ने इनके पास से 5 मोबाइल फोन और 9 अवैध सिम कार्ड जब्त किए हैं। ये आरोपी फर्जी केवाईसी के सहारे अतिरिक्त सिम कार्ड निकालकर साइबर ठगों को मोटी रकम पर बेचते थे।
Jamshedpur Cyber Police को दूरसंचार विभाग से मिला था अहम इनपुट
इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश दूरसंचार विभाग से मिले एक गोपनीय पत्र के बाद हुआ। दूरसंचार विभाग ने पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को इस संबंध में खुफिया रिपोर्ट भेजी थी। पत्र में जमशेदपुर के कुछ पॉश एजेंटों की साइबर अपराधियों के साथ सांठगांठ होने की पुख्ता जानकारी दी गई थी। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पीओएस एजेंट रौनक कुमार, सन्नी कुमार साव और जियो कर्मी प्रकाश कुमार की मिलीभगत से कई सिम कार्ड संदिग्ध रूप से जारी किए गए थे। इन सभी सिम कार्डों को सक्रिय कर सीधे साइबर अपराधियों को सौंप दिया गया था। इनमें से कई सिम कार्डों के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय संचार साथी के चक्षु पोर्टल और गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर गंभीर धोखाधड़ी की शिकायतें पहले से दर्ज थीं।
Jamshedpur Cyber Police ने पांच मोबाइल और नौ सिम कार्ड किए जब्त
दूरसंचार विभाग से साक्ष्य मिलने के बाद वरीय पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को समझा। एसएसपी ने फौरन विशेष टीम को छापेमारी का निर्देश दिया। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को दबोच लिया। तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से कुल 5 मोबाइल फोन और 9 एक्टिवेटेड सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इन जब्त मोबाइलों के कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट की गहन फॉरेंसिक जांच कर रही है। इससे यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने अब तक कुल कितने फर्जी सिम कार्ड बेचे हैं। साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि इन नंबरों के जरिए देशभर में कितने करोड़ रुपये की वित्तीय ठगी को अंजाम दिया गया है।
सीधे-सादे ग्राहकों से दोहरी केवाईसी कराकर निकालते थे फर्जी सिम
पुलिस जांच में आरोपियों के गोरखधंधे और अपराध करने के तौर-तरीकों का पूरा ब्योरा सामने आया है। आरोपी सरकारी दिशा-निर्देशों और दूरसंचार विभाग की अनिवार्य केवाईसी प्रक्रिया की धज्जियां उड़ा रहे थे। ये लोग सिम कार्ड खरीदने आने वाले सीधे-सादे और कम पढ़े-लिखे नागरिकों को अपना आसान शिकार बनाते थे। जब कोई ग्राहक दुकान पर नया सिम लेने आता था, तो आरोपी सिस्टम में तकनीकी खराबी का बहाना बनाते थे। वे झांसा देकर ग्राहक का बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट या चेहरा दो से तीन बार स्कैन करा लेते थे। इसके बाद ग्राहक को तो केवल एक ही सिम कार्ड दिया जाता था। जबकि उसी की पहचान पर जनरेट हुआ दूसरा या अतिरिक्त सिम कार्ड ये आरोपी अपने पास चुपके से रख लेते थे। बाद में इन प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्डों को भारी रकम लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे साइबर ठगों को बेच दिया जाता था। इन नंबरों का इस्तेमाल बैंक फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और वित्तीय धोखाधड़ी में किया जाता था।
गिरफ्तार तीनों आरोपियों की हुई पहचान, पुलिस खंगाल रही नेटवर्क
पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों आरोपियों की पहचान पूरी तरह पुष्ट कर ली गई है। पहला आरोपी रौनक कुमार जमशेदपुर के बर्मामाइंस थाना क्षेत्र अंतर्गत लांग टांग बस्ती, रघुवर नगर के रोड नंबर 9 का रहने वाला है। दूसरा आरोपी सन्नी कुमार साव गोलमुरी थाना क्षेत्र के केबुल बस्ती, रोड नंबर 1 का निवासी है। ये दोनों आरोपी पीओएस एजेंट के रूप में काम करते थे। वहीं तीसरा आरोपी प्रकाश कुमार टेल्को थाना क्षेत्र के रामाधीन बगान, मनीफीट का रहने वाला है। प्रकाश कुमार जियो कंपनी में कार्यरत था और सिम जारी करने की तकनीकी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा था। पुलिस इनके पूरे सिंडिकेट और वित्तीय लेन-देन के खातों की भी जांच कर रही है।
आईटी एक्ट और दूरसंचार अधिनियम के तहत केस दर्ज, ये अधिकारी थे शामिल
इस गंभीर मामले में जमशेदपुर साइबर अपराध थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत धाराओं के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 (आईटी एक्ट) और दूरसंचार अधिनियम 2023 की धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है। इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी श्रीनिवास कुमार, पुलिस निरीक्षक अमित अभिषेक, सब इंस्पेक्टर चेतन बैरागी, पंकज निषाद, रमेश कुमार राजवार, प्रदीप खलखो, रूपेश कुमार कोठारी और मुख्य अनुसंधानकर्ता प्रदीप वर्मा शामिल थे।
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