पीएचडी प्रवेश, वित्तीय पारदर्शिता और आउटसोर्सिंग टेंडर को लेकर शुरू हुआ आंदोलन, मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा अनशन
BBMKU Dhanbad: धनबाद स्थित बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) में विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली को लेकर छात्र आंदोलन तेज हो गया है। आजसू छात्र संघ ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया जा रहा है। प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
BBMKU Dhanbad : मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू
आजसू छात्र संघ के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर के मुख्य द्वार पर धरना देते हुए अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। संघ ने कुलपति और विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दे रहा है। कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक मामलों में भी स्पष्टता का अभाव है।
छात्र संघ का कहना है कि विश्वविद्यालय में पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए। विद्यार्थियों को समय पर शैक्षणिक सूचनाएं मिलनी चाहिए। प्रशासनिक निर्णयों की जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए। इसके बावजूद कई मामलों में विश्वविद्यालय की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है। इसी के विरोध में आंदोलन शुरू किया गया है।
BBMKU Dhanbad : विशाल महतो ने वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया
आजसू छात्र संघ के प्रदेश सचिव विशाल महतो ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर विभिन्न स्तरों पर वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। वित्तीय मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। संघ ने प्रशासन से इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करने और संबंधित मामलों की जांच कराने की मांग की है।
विशाल महतो ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल प्रशासनिक संस्था नहीं है। यहां हजारों विद्यार्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है। ऐसे में विश्वविद्यालय के प्रत्येक निर्णय में छात्रहित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से लंबित मामलों पर लिखित जवाब देने की मांग भी की।
पीएचडी प्रवेश परीक्षा को लेकर छात्रों में नाराजगी
आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा पीएचडी में नामांकन से जुड़ा है। विशाल महतो के अनुसार, पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विद्यार्थियों को समय पर सूचना नहीं मिल रही थी। प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र असमंजस में थे। संघ ने मांग की कि विश्वविद्यालय पीएचडी प्रवेश से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय पर पूरा करे। प्रवेश से जुड़ी सूचनाएं वेबसाइट पर जारी की जाएं। इससे अभ्यर्थियों को आवेदन और तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर 22 अक्टूबर 2026 को पीएचडी प्रवेश का नोटिस प्रकाशित होने का रिकॉर्ड उपलब्ध है। इसके बाद 24 अक्टूबर को संशोधित सूचना और 26 अक्टूबर को सीटों का विवरण भी जारी किया गया है। इसलिए 2 नवंबर 2026 की स्थिति में यह कहना सही नहीं होगा कि पीएचडी प्रवेश का नोटिफिकेशन बिल्कुल जारी नहीं हुआ है। आंदोलन से संबंधित बयान किस तारीख को दिया गया था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
सीनेट की बैठक और दीक्षांत समारोह पर भी जवाब मांगा
आजसू छात्र संघ ने विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक और दीक्षांत समारोह को लेकर भी सवाल उठाए हैं। विशाल महतो का कहना है कि इन दोनों महत्वपूर्ण विषयों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक संतोषजनक लिखित जवाब नहीं मिला है। संघ चाहता है कि प्रशासन इन मामलों में अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
इस संबंध में विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध सूचनाओं से पता चलता है कि सितंबर 2026 में तीसरे दीक्षांत समारोह के लिए अलग-अलग कार्यों की निविदा और कोटेशन संबंधी सूचनाएं जारी की गई थीं। इनमें टेंट, सजावट, फूलों की व्यवस्था, लाइटिंग, एसी, जनरेटर, साउंड सिस्टम, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी जैसी सेवाएं शामिल हैं। 24 सितंबर को तीसरी सीनेट बैठक के लिए खानपान की व्यवस्था से संबंधित कोटेशन भी आमंत्रित किया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि इन आयोजनों से जुड़ी कुछ प्रशासनिक गतिविधियां चल रही थीं। हालांकि, इससे बैठक और समारोह की तारीख या संघ की ओर से मांगे गए लिखित जवाब की स्थिति की पुष्टि नहीं होती।
आउटसोर्सिंग टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल, पुरानी निविदा रद्द करने की मांग
आंदोलन के दौरान आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवाएं लेने की प्रक्रिया भी प्रमुख मुद्दा रही। विशाल महतो ने विश्वविद्यालय की निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा निविदा व्यवस्था में श्रमिकों के हितों और छोटे कारोबारियों की भागीदारी को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
संघ ने पूर्व में जारी निविदा को तत्काल रद्द करने की मांग की है। साथ ही नए सिरे से निविदा आमंत्रित करने की बात कही है। संघ का कहना है कि नई निविदा झारखंड सरकार की ओर से निर्धारित नवीनतम न्यूनतम मजदूरी और संशोधित परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) की दरों के आधार पर तैयार की जानी चाहिए।
इस मांग के पीछे श्रमिकों को उचित पारिश्रमिक दिलाने का तर्क दिया गया है। संघ का मानना है कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों के चयन में न्यूनतम मजदूरी के सरकारी प्रावधानों का पालन अनिवार्य होना चाहिए। कर्मचारियों को निर्धारित दर से कम भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।
न्यूनतम मजदूरी और संशोधित वीडीए का मामला भी उठा
झारखंड सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी न्यूनतम मजदूरी और वीडीए की संशोधित दरें निर्धारित की हैं। श्रम विभाग की अधिसूचना के अनुसार धनबाद क्षेत्र श्रेणी ए में आता है। यहां अकुशल श्रमिकों के लिए मासिक न्यूनतम मजदूरी 13,586 रुपये निर्धारित की गई है। अर्धकुशल श्रमिकों के लिए यह राशि 14,253 रुपये है। कुशल श्रमिकों के लिए 18,782 रुपये और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए 21,656 रुपये मासिक दर निर्धारित की गई है।
ऐसे में विश्वविद्यालय की आउटसोर्सिंग निविदा में इन संशोधित दरों को शामिल करने की मांग को श्रमिक हितों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, संबंधित निविदा की शर्तों और भुगतान व्यवस्था की स्वतंत्र जांच के बिना यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि किसी एजेंसी या अधिकारी ने नियमों का उल्लंघन किया है।
GeM नियमों के तहत एमएसएमई और श्रम सहकारी समितियों को छूट देने की मांग
आजसू छात्र संघ ने निविदा प्रक्रिया में छोटे उद्यमों और श्रम सहकारी समितियों की भागीदारी का मुद्दा भी उठाया है। विशाल महतो ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की प्रचलित नीतियों के साथ-साथ गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के प्रावधानों का भी पालन होना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और श्रम सहकारी समितियों को नियमानुसार राहत दी जाए। इसके तहत टर्नओवर, पूर्व कार्यानुभव और अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) यानी निविदा सुरक्षा राशि में निर्धारित नियमों के अनुसार छूट मिलनी चाहिए।
संघ का तर्क है कि बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा में छोटी इकाइयों को कई तरह की व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि पात्र इकाइयों को सरकारी नियमों के तहत मिलने वाली छूट का लाभ दिया जाए, तो उन्हें भी निविदा में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इससे श्रम सहकारी समितियों और स्थानीय उद्यमियों की भागीदारी बढ़ सकती है।
हालांकि, एमएसएमई को मिलने वाली छूट प्रत्येक निविदा में स्वतः लागू नहीं होती। इसके लिए संबंधित इकाई की पात्रता और निविदा की शर्तों का पालन जरूरी होता है। इसलिए संघ ने विश्वविद्यालय से निविदा की शर्तों को सरकारी प्रावधानों के अनुरूप रखने की मांग की है।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
आजसू छात्र संघ के कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करता, तब तक अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने प्रशासन से छात्रों की समस्याओं का समाधान करने और वित्तीय तथा प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता बरतने की अपील की है।
फिलहाल इस आंदोलन के जरिए विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कई अहम सवाल खड़े किए गए हैं। इनमें पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया, सीनेट की बैठक, दीक्षांत समारोह, आउटसोर्सिंग निविदा और श्रमिकों के न्यूनतम वेतन का मामला शामिल है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आंदोलनकारियों और विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं।
read also:Jharkhand High Court: ईडी केस में सरकार पर 8 हजार का जुर्माना


