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Jamshedpur News: CSIR-NML में धातु पाइपों पर प्रशिक्षण शुरू

CIPET के 12 तकनीकी अधिकारी ले रहे हिस्सा, 6 नवंबर तक चलेगा पांच दिवसीय कार्यक्रम

Jamshedpur News: जमशेदपुर स्थित सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML) में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET) के अधिकारियों के लिए धातु पाइपों पर पांच दिवसीय एक्सपोजर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। 2 नवंबर 2026 को कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। यह प्रशिक्षण 6 नवंबर तक चलेगा। इसमें देश के विभिन्न CIPET केंद्रों से आए 12 तकनीकी अधिकारी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य धातु पाइपों की गुणवत्ता, मजबूती, सुरक्षा और विश्वसनीयता से जुड़ी तकनीकी जानकारी देना है। इसके तहत प्रतिभागियों को प्रयोगशाला परीक्षण, निरीक्षण और सामग्री के मूल्यांकन की प्रक्रियाओं से परिचित कराया जाएगा।

Jamshedpur News: संस्थागत सहयोग और तकनीकी दक्षता पर जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को CSIR-NML के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी और मैटेरियल्स इंजीनियरिंग डिवीजन (MTE) के प्रमुख डॉ. एस. शिवप्रसाद ने संबोधित किया। दोनों विशेषज्ञों ने तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग से तकनीकी दक्षता को मजबूत किया जा सकता है। इससे उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों और उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद मिलती है।

उद्घाटन सत्र में धातु पाइपों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सामग्री परीक्षण, गुणवत्ता आश्वासन और नियमित निरीक्षण की भूमिका पर चर्चा हुई। पाइपों का इस्तेमाल विभिन्न औद्योगिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में होता है। ऐसे में उनकी मजबूती और गुणवत्ता का आकलन महत्वपूर्ण है। निर्धारित मानकों के अनुसार परीक्षण करने से सामग्री की कमियों का पता लगाने और संभावित तकनीकी समस्याओं को रोकने में मदद मिलती है।

Jamshedpur News: प्रशिक्षण में शामिल होंगे कई तकनीकी विषय

कार्यक्रम के दौरान धातु पाइपों के निर्माण से लेकर उनकी जांच तक के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी जाएगी। इसमें सामग्री अभिलक्षणन, भौतिक धातुकर्म और यांत्रिक परीक्षण प्रमुख विषय होंगे। प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि किसी धातु की संरचना और उसके गुणों का आकलन किस तरह किया जाता है। इससे पाइप की मजबूती और उपयोग के दौरान उसके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में मदद मिलती है।

प्रशिक्षण में गैर-विनाशकारी परीक्षण (NDT) पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस तकनीक के जरिए सामग्री या उसके किसी हिस्से को नुकसान पहुंचाए बिना संभावित दोषों का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा, संक्षारण मूल्यांकन और सुरक्षात्मक कोटिंग से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी जाएगी। ये प्रक्रियाएं पाइपों को लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाए रखने और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण हैं।

प्रयोगशाला में मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

पांच दिनों के इस कार्यक्रम में केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी जाएगी। विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ प्रयोगशाला में प्रदर्शन और व्यावहारिक अभ्यास भी होंगे। प्रतिभागियों को परीक्षण के विभिन्न तरीकों, उपकरणों के इस्तेमाल और परिणामों के विश्लेषण से परिचित कराया जाएगा। भारतीय मानकों के अनुरूप निरीक्षण प्रक्रियाओं को समझना भी प्रशिक्षण का अहम हिस्सा होगा।

कार्यक्रम में स्टील पाइप, ट्यूब और डक्टाइल आयरन (DI) पाइपों की जांच पर विशेष जानकारी दी जाएगी। इन उत्पादों के निरीक्षण के दौरान किन मानकों और प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए, इस पर भी चर्चा होगी। इससे CIPET के तकनीकी अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र में सामग्री की गुणवत्ता का आकलन करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

CSIR-NML और CIPET के बीच सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

CSIR-NML में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन का उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ना है। संस्थान अपने तकनीकी संसाधनों और विशेषज्ञता के माध्यम से उद्योगों तथा संबंधित संस्थानों के अधिकारियों की दक्षता बढ़ाने की दिशा में काम करता है। प्रयोगशाला की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विभिन्न क्षेत्रों में कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध है।

इस प्रशिक्षण से CIPET के अधिकारियों को धातु पाइपों की गुणवत्ता जांच और निरीक्षण से संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा। इससे दोनों संस्थानों के बीच ज्ञान साझा करने और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ. बिराज कुमार साहू ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। पांच दिवसीय यह प्रशिक्षण 6 नवंबर 2026 को संपन्न होगा।

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