कोरम के अभाव और कार्यकाल समाप्ति पर उठे सवाल, ट्रस्टी डॉ. डीपी शुक्ल ने लगाए गंभीर आरोप
UP Sangh Jamshedpur: उत्तर प्रदेश संघ की आम सभा को लेकर विवाद गहरा गया है। संघ के ट्रस्टी डॉ. डीपी शुक्ल ने बैठक को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार यह बैठक नियमों के विरुद्ध बुलाई गई थी। संघ के संविधान में अध्यक्ष को बैठक बुलाने का अधिकार नहीं है। पदच्युत अध्यक्ष अखिलेश दुबे ने यह मनमानी बैठक आयोजित की थी। इसके कारण सदस्यों के बीच भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। पूरे मामले की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी गई है।
UP Sangh Jamshedpur: कोरम के लिए जरूरी थे 105 सदस्य, पहुंचे सिर्फ 42 लोग
बताया गया है कि बैठक में कोरम पूरा नहीं होने का बड़ा मामला सामने आया है। संघ में कुल 208 आजीवन सदस्य पंजीकृत हैं। नियमानुसार बैठक के लिए 105 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य थी। कुल सदस्यों में से 50 प्रतिशत से अधिक सदस्य जरूरी थे। जागरूक सदस्यों ने इस अवैध बैठक का बहिष्कार कर दिया। सभागार में केवल 42 सदस्य ही उपस्थित हुए थे। कोरम के अभाव में बैठक स्वतः ही अमान्य हो गई। इसके बावजूद बैठक की कार्यवाही जारी रखी गई थी। यह पूरी प्रक्रिया संघ के नियमों का खुला उल्लंघन है।
UP Sangh Jamshedpur: 31 अक्टूबर को समाप्त हुआ कार्यकाल, पद पर बने रहने का हक नहीं
ट्रस्टी डॉ. डीपी शुक्ल ने कार्यकाल समाप्ति का मुद्दा उठाया है। वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल 31 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो गया। समय सीमा समाप्त होने के बाद यह पद अवैध हो गया। अखिलेश दुबे को अब पद पर बने रहने का हक नहीं है। वे किसी भी तरह की बैठक बुलाने के पात्र नहीं हैं। इसके बाद भी जबरन संघ के कार्यों में हस्तक्षेप किया गया। उन्होंने संघ की संपत्तियों पर कब्जे की कोशिश का आरोप लगाया। इस तानाशाही रवैये से संघ की छवि धूमिल हो रही है। सदस्यों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है।
गौरी गांव की जमीन और फंड के बंदरबांट को लेकर लगाए गंभीर आरोप
बैठक बुलाने के पीछे वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं। ट्रस्टी ने आरोप लगाया कि फंड का बंदरबांट किया जा रहा है। संघ के बैंक खातों में जमा राशि का दुरुपयोग हो रहा है। गौरी गांव स्थित संघ की जमीन पर भ्रम फैलाया जा रहा है। यह जमीन संघ द्वारा विधिवत खरीदी गई संपत्ति है। निजी स्वार्थ के लिए इस जमीन को विवादित बनाया गया। सदस्यों को गुमराह कर सत्ता में बने रहने की कोशिश है। संगठन के धन को सुनियोजित तरीके से हड़पने की साजिश है। इस अवैध वित्तीय खेल की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
निबंधन महानिरीक्षक के पत्र पटल पर नहीं रखने पर बैठक में हंगामा
डॉ. डीपी शुक्ल ने बताया है कि बैठक में शामिल कुछ सदस्यों ने इन घपलों पर सवाल उठाए। सदस्यों ने निबंधन महानिरीक्षक के तीन जांच पत्रों पर जवाब मांगा। इन महत्वपूर्ण पत्रों को जानबूझकर पटल पर नहीं रखा गया। इसके बाद सभागार में सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। निबंधन विभाग ने कार्यकाल विस्तार पर संघ से जवाब मांगा था। विभाग ने पूछा था कि कार्यकाल एक वर्ष कैसे बढ़ाया गया। इस सवाल का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। मामले को दबाने के लिए अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है। इस पूरे फर्जीवाड़े पर पुलिस और प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा।
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