spot_img
spot_img
HomeझारखंडPatel Jayanti: संतोष कुमार गंगवार ने सरदार वल्लभभाई पटेल को किया नमन

Related Posts

Patel Jayanti: संतोष कुमार गंगवार ने सरदार वल्लभभाई पटेल को किया नमन

राष्ट्रीय एकता दिवस पर लोक भवन में राज्यपाल संतोष गंगवार ने दी श्रद्धांजलि

Patel Jayanti के अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शनिवार, 31 अक्टूबर को देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री और लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्होंने रांची स्थित लोक भवन में सरदार पटेल के चित्र पर माल्यार्पण किया। राज्यपाल ने उन्हें नमन करते हुए देश के प्रति उनके योगदान को याद किया। 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है।

Patel Jayanti: लोक भवन में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम

रांची स्थित लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। उन्होंने देश की आजादी और राष्ट्रीय एकता के लिए पटेल के योगदान का स्मरण किया। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में निभाई गई भूमिका को भी याद किया गया।

सरदार पटेल की जयंती देश के लिए उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करने का अवसर है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आजादी के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक विभिन्न रियासतों को एकजुट करना था। सरदार पटेल ने इस दिशा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। उनके प्रयासों ने एक मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाई।

Patel Jayanti: पर याद किया गया एकीकरण में योगदान

Patel Jayanti के मौके पर सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और कार्यों को याद करना देश की एकता के महत्व को समझने का अवसर भी है। उनका जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। पेशे से वकील रहे पटेल ने महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी शुरू की थी। उन्होंने किसानों और आम लोगों से जुड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया।

खेड़ा सत्याग्रह और बारडोली सत्याग्रह में उनकी भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। वर्ष 1918 में खेड़ा सत्याग्रह के दौरान उन्होंने किसानों के हितों को लेकर आवाज उठाई। इसके बाद 1928 में बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व किया। इस आंदोलन में किसानों को संगठित करने और उनके अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बारडोली आंदोलन की सफलता के बाद उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली। इसके बाद वे इसी नाम से देशभर में प्रसिद्ध हुए।

आजादी के बाद 560 से अधिक रियासतों के विलय में निभाई अहम भूमिका

15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। उस समय देश के सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं। इनमें अलग-अलग रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना सबसे महत्वपूर्ण था। ब्रिटिश शासन की समाप्ति के बाद देश में 560 से अधिक रियासतें मौजूद थीं। इन रियासतों के शासकों के सामने भारत या पाकिस्तान में शामिल होने अथवा अलग रहने का विकल्प था। ऐसे समय में सरदार पटेल ने राष्ट्रीय एकीकरण की जिम्मेदारी संभाली।

पटेल ने तत्कालीन रियासतों के शासकों से बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए उन्हें भारत में शामिल करने का अभियान चलाया। इस काम में वीपी मेनन ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। दोनों के प्रयासों से अधिकांश रियासतों का भारतीय संघ में विलय संभव हुआ। यह प्रक्रिया आसान नहीं थी। कई स्थानों पर राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आईं। इसके बावजूद पटेल ने धैर्य, दृढ़ता और कुशल नेतृत्व के साथ इस जिम्मेदारी को पूरा किया।

आजादी के बाद सरदार पटेल देश के पहले उप प्रधानमंत्री बने। उन्होंने गृह मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। देश की आंतरिक व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशासनिक ढांचे को व्यवस्थित करने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने अखिल भारतीय सेवाओं को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। इसी वजह से उन्हें आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।

हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय वर्ष 2014 में लिया गया था। इसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति नागरिकों को जागरूक करना है। इस दिन देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सरकारी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी कार्यक्रम होते हैं। इनमें एकता की शपथ, जागरूकता गतिविधियां और रन फॉर यूनिटी जैसे आयोजन शामिल रहते हैं।

राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व को याद करने तक सीमित नहीं है। यह भारत की विविधता और साझा राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने का संदेश भी देता है। देश में अलग-अलग भाषा, संस्कृति और परंपराओं के लोग रहते हैं। ऐसे में आपसी सद्भाव और एकजुटता का महत्व और बढ़ जाता है। सरदार पटेल का जीवन इस बात का उदाहरण है कि मजबूत नेतृत्व और सामूहिक प्रयासों से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर देशभर में उनके योगदान को याद किया जाता है। उनका जीवन स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय एकीकरण और प्रशासनिक व्यवस्था के निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धियों के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

Read also: Odia Opera: जामटुटी में ओड़िआ ओपेरा की धूम, सन्नी उरांव ने किया उद्घाटन

Latest Posts