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Ranchi Crime: किराये की गाड़ियां लेकर बेचने वाला गिरोह बेनकाब, महिला समेत तीन गिरफ्तार

फर्जी दस्तावेजों के सहारे वाहन बेचकर लोगों को लगाते थे चूना, पुलिस ने चार गाड़ियां कीं जब्त; 25 पीड़ितों के बयान पर दर्ज हुआ मामला

Ranchi Crime: राजधानी रांची में किराये की गाड़ियों के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। गिरोह के सदस्य पहले वाहन मालिकों और ट्रैवल एजेंसियों से गाड़ियां किराये पर लेते थे। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर खुद को गाड़ी का मालिक बताते थे। फिर उन गाड़ियों को दूसरे लोगों को बेच देते थे या उनके पास गिरवी रख देते थे। इस मामले में पुलिस ने बूटी मोड़ निवासी महिला ज्योति उर्फ बॉबी और उसके दो सहयोगियों मनोज श्रीवास्तव तथा विश्वजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार गाड़ियां भी जब्त की हैं। अब तक इस धोखाधड़ी के मामले में 25 पीड़ित सामने आए हैं।

Ranchi Crime: महिला किराये पर लेती थी गाड़ियां, सहयोगी तलाशते थे ग्राहक

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस गिरोह में महिला की भूमिका अहम थी। वह अलग-अलग वाहन मालिकों और ट्रैवल एजेंसियों से संपर्क कर गाड़ियां किराये पर लेती थी। शुरुआत में किराये पर वाहन लेकर भरोसा कायम किया जाता था। इसके बाद गिरोह के दूसरे सदस्य सक्रिय हो जाते थे।

गाड़ी मिलने के बाद फर्जी कागजात के जरिए उसे दूसरे ग्राहक के सामने बिक्री के लिए पेश किया जाता था। इस काम में गिरोह के अन्य सदस्य भी मदद करते थे। ग्राहक को गाड़ी के असली मालिकाना हक को लेकर गुमराह किया जाता था। इस तरह वाहन मालिक को उसकी जानकारी के बिना आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता था।

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस तरीके से कई लोगों को निशाना बनाया गया। गिरोह का नेटवर्क केवल एक या दो वाहनों तक सीमित नहीं था। अलग-अलग लोगों से गाड़ियां लेकर उन्हें धोखाधड़ी के जरिए दूसरे लोगों तक पहुंचाया जाता था।

25 पीड़ितों के बयान पर दर्ज हुआ मामला

पुलिस जांच के दौरान अब तक 25 भुक्तभोगियों की पहचान हुई है। इन लोगों के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। सभी पीड़ितों से धोखाधड़ी से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में लगी है कि आरोपियों ने कितने वाहनों को इस तरीके से दूसरे लोगों के हाथों बेचा या गिरवी रखा।

इस मामले में पुलिस ने चार गाड़ियों को जब्त किया है। जब्त वाहनों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन गाड़ियों के वास्तविक मालिक कौन हैं और किन लोगों के माध्यम से इनका सौदा किया गया था।

पुलिस को आशंका है कि इस पूरे मामले में कुछ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

विश्वजीत सिंह का आपराधिक इतिहास, कई थानों में दर्ज हैं मामले

इस मामले में गिरफ्तार विश्वजीत सिंह को लेकर पुलिस ने उसके आपराधिक इतिहास की भी जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ कांके समेत रांची के कई थानों में दर्जनों मामले दर्ज हैं। उस पर हत्या और फायरिंग जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्तता के आरोप हैं।

पुलिस ने बताया कि विश्वजीत सिंह रांची पुलिस की ओर से वारंटी भी है। उसकी तलाश काफी दिनों से की जा रही थी। वाहन धोखाधड़ी के इस मामले में उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है।

गिरफ्तार महिला ज्योति उर्फ बॉबी और मनोज श्रीवास्तव की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि गिरोह में किसकी क्या जिम्मेदारी थी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किन लोगों की मदद ली जाती थी।

फर्जी दस्तावेजों से वाहन कारोबार करने के तरीके की जांच

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के काम करने के तरीके की बारीकी से जांच कर रही है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि आरोपियों को किराये पर गाड़ियां उपलब्ध कराने वाले लोगों की पहचान कैसे होती थी। इसके अलावा फर्जी दस्तावेज कहां तैयार किए जाते थे और वाहनों के सौदे में किन लोगों की भूमिका रहती थी, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने अब तक कितने वाहन मालिकों को नुकसान पहुंचाया है। जिन लोगों ने इन गाड़ियों को खरीदा या गिरवी रखा, उनकी भूमिका और जानकारी भी जांच के दायरे में आ सकती है।

इस तरह के मामलों में वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाने के साथ अपनी गाड़ियों की बरामदगी के लिए भी परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं, फर्जी कागजात के आधार पर वाहन हासिल करने वाले लोगों को भी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।

पुलिस की कार्रवाई से वाहन मालिकों को मिली राहत की उम्मीद

रांची में सामने आया यह मामला किराये पर वाहन देने वाले लोगों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब उन वाहन मालिकों को अपनी गाड़ियां वापस मिलने की उम्मीद है, जिनके वाहन धोखाधड़ी के जरिए दूसरे लोगों तक पहुंचाए गए थे।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जब्त चार वाहनों के दस्तावेजों की जांच और 25 पीड़ितों से जुड़े मामलों की पड़ताल जारी है। पुलिस का प्रयास है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

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