11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को सौंपी उपाधियां, विश्वविद्यालय की स्मारिका का किया लोकार्पण
Vinoba Bhave University Hazaribagh: झारखंड के हजारीबाग स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय में शुक्रवार को 11वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 65 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। साथ ही विश्वविद्यालय की स्मारिका का लोकार्पण भी किया। समारोह में विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
VBU Hazaribagh: परिश्रम, अनुशासन और धैर्य का प्रतीक है दीक्षांत समारोह
राज्यपाल संतोष गंगवार ने अपने संबोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का आयोजन नहीं है। यह विद्यार्थियों के वर्षों के परिश्रम, अनुशासन, धैर्य और साधना का प्रतीक है। एक उपाधि के पीछे विद्यार्थी की निरंतर मेहनत और समर्पण छिपा होता है। यह उनके शैक्षणिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्हें अपने कर्तव्यों का एहसास भी कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा और ज्ञान का इस्तेमाल समाज और देश के विकास में करना चाहिए। एक शिक्षित नागरिक के रूप में उनकी जिम्मेदारी समाज के प्रति भी है।
युवाओं से देश के विकास में योगदान देने की अपील
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश के विकास में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए शिक्षित, कुशल और जिम्मेदार नागरिकों की जरूरत है। इस दिशा में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका भी अहम है।
उन्होंने विद्यार्थियों को लगातार सीखते रहने की प्रेरणा दी। कहा कि डिग्री हासिल करना शिक्षा का अंतिम पड़ाव नहीं है। बदलते समय के साथ नई तकनीक और नए कौशल सीखना जरूरी है। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान को व्यवहार में उतारना चाहिए। इसके साथ ही नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
20 स्नातकोत्तर टॉपरों और 36 शोधार्थियों को लेकर भी रहा समारोह खास
दीक्षांत समारोह में विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों को विशेष महत्व दिया गया। समारोह से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम के अनुसार, 20 स्नातकोत्तर टॉपरों को स्वर्ण पदक प्रदान किए जाने का प्रावधान था। वहीं, नौ स्नातक टॉपरों को प्रमाण पत्र दिया जाना था। इसके अलावा 36 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की जानी थी।
इन उपलब्धियों ने विश्वविद्यालय में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में विद्यार्थियों की मेहनत को सामने रखा। अलग-अलग विषयों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह दिन यादगार रहा। स्वर्ण पदक और उपाधियां प्राप्त करना उनके शैक्षणिक जीवन की बड़ी उपलब्धि है।
आचार्य विनोबा भावे की प्रतिमा पर पुष्पांजलि से हुई शुरुआत
समारोह की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित आचार्य विनोबा भावे की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद राज्यपाल संतोष गंगवार अकादमिक शोभायात्रा में शामिल हुए। शोभायात्रा में विश्वविद्यालय के अधिकारी और शैक्षणिक प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इसके बाद स्वामी विवेकानंद सभागार में मुख्य समारोह आयोजित किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की स्मारिका का लोकार्पण भी किया गया। इसमें विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और उपलब्धियों को सामने रखा गया। कार्यक्रम को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। समारोह से पहले अकादमिक शोभायात्रा और मंचीय कार्यक्रम का पूर्वाभ्यास भी किया गया था।
कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा ने दी विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा ने स्वागत संबोधन दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और प्रयासों का भी उल्लेख किया।
कुलपति ने कहा कि कर्मचारियों की कमी जैसी चुनौतियों के बावजूद विश्वविद्यालय बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सीमित मानव संसाधनों के बीच भी शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। इसके लिए शैक्षणिक कार्यक्रमों को मजबूत बनाने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने पर लगातार काम किया जा रहा है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ शोध और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए भी बेहतर अवसर मिलें।
उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने पर रहा जोर
11वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों की उपलब्धियों के साथ विश्वविद्यालय की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है। उन्हें ऐसे युवाओं को तैयार करना है, जो अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा से समाज के विकास में योगदान दे सकें।
विनोबा भावे विश्वविद्यालय में आयोजित यह समारोह विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर रहा। यहां उन्हें वर्षों की मेहनत का सम्मान मिला। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
गौरतलब है कि विनोबा भावे विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1992 में हुई थी। इसका मुख्यालय हजारीबाग में स्थित है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत विभिन्न विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध की पढ़ाई होती है। 11वें दीक्षांत समारोह ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा और विद्यार्थियों की उपलब्धियों को एक बार फिर सामने रखा।


