Chatra News: दीभा मोहल्ला की खतियानी जमीन पर भू-माफियाओं की नजर; होल्डिंग में छेड़छाड़, फर्जी वंशावली और लाखों के लेन-देन का गंभीर आरोप
Chatra News: झारखंड के चतरा जिले में जमीन फर्जीवाड़े और कूट रचना का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक ही तारीख को सात अलग-अलग जमीनों की अवैध रजिस्ट्री कराने का सनसनीखेज वाकया प्रकाश में आया है। इस पूरे फर्जीवाड़े में जमीन किसी और की, विक्रेता कोई और, होल्डिंग किसी तीसरे व्यक्ति के नाम और वंशावली जारी करने वाला वार्ड पार्षद भी किसी अन्य वार्ड का निकला है।
शहर के दीभा मोहल्ला निवासी जमीन मालिक नीरज सिन्हा और राहुल देव ने जिला प्रशासन के समक्ष कड़े सवाल खड़े करते हुए रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मियों और सब रजिस्ट्रार (Sub-Registrar) संतोष रजक की संलिप्तता और कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
फर्जी दस्तावेजों और होल्डिंग में छेड़छाड़ का खेल
पीड़ित जमीन मालिकों के अनुसार, दीभा मोहल्ला में स्थित उनकी पुश्तैनी और खतियानी जमीन हड़पने के लिए भू-माफियाओं ने शातिर साजिश रची। आरोप है कि पहले नगर परिषद द्वारा निर्गत एक होल्डिंग रसीद में भारी फेरबदल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इसके बाद उन्हीं फर्जी कागजातों के आधार पर दूसरे जिले से कथित तौर पर पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) ली गई और चतरा निबंधन कार्यालय में एक ही दिन में सात जमीनों की रजिस्ट्री करा ली गई।
जमीन मालिकों द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, निबंधन में प्रस्तुत रसीद संख्या 269558611072025062417 और होल्डिंग संख्या 0070000861000A3 सत्येंद्र कुमार सिन्हा के नाम पर 11 जुलाई 2025 को निर्गत दिखाई गई है। जबकि इसी समान रसीद संख्या पर होल्डिंग संख्या 0200000861000A3 मूल रूप से वार्ड-20 की निवासी फूलवा देवी के नाम पर दर्ज है। दोनों ही मामलों में राजस्व राशि और राजस्व वर्ष एक ही होने का दावा किया गया है। नगर परिषद के टैक्स विभाग ने भी सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ की पुष्टि की है।
वार्ड पार्षद की भूमिका पर उठे सवाल, बिना जांच के कैसे हुई रजिस्ट्री?
इस पूरे मामले में वार्ड नंबर-6 के पार्षद दीपक कुमार वर्मा पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने नियम विरुद्ध जाकर अपने लेटरहेड पर फर्जी वंशावली (Genealogy) जारी की, जबकि संबंधित जमीन और विक्रेता (सत्येंद्र कुमार सिन्हा) वार्ड-6 के अंतर्गत नहीं आते हैं, और प्रस्तुत होल्डिंग वार्ड-7 की है। पार्षद का कहना है कि सत्येंद्र कुमार सिन्हा ने SIR में नाम देने के नाम पर वंशावली मांगी थी, जिसे खतियाن देखकर जारी किया गया था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जमीन मालिकों ने पहले ही सब रजिस्ट्रार, अंचल अधिकारी (CO), एसडीओ, एलआरडीसी, अपर समाहर्ता और उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर संभावित फर्जीवाड़े की आशंका जताई थी। इसके बावजूद बिना दस्तावेजों का सही सत्यापन किए रजिस्ट्री कैसे संपन्न हो गई?
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
-
सब रजिस्ट्रार संतोष रजक: अवर निबंधन पदाधिकारी संतोष रजक का कहना है कि कार्यालय स्तर पर बिना दस्तावेजों की गहन जांच के कोई रजिस्ट्री नहीं होती है। यदि किसी ने फर्जी कागजातों से गुमराह कर रजिस्ट्री कराई है, तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने पैसे के लेनदेन और भ्रष्टाचार के आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
-
अपर समाहर्ता अरविंद कुमार: अपर समाहर्ता अरविंद कुमार ने पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित जमीन मालिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में संलिप्त भू-माफियाओं, क्रेتا-विक्रेता और अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कूट रचना और जालसाजी की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराएंगे।
read also:Ranchi News: डंगरा टोली में नाबालिग की संदिग्ध मौत


