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Vehicle Fraud: चाईबासा में वाहन दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप

शंकराचार्य मोटर्स के दो पूर्व कर्मचारियों पर ग्राहकों से पैसे लेने का आरोप, मुफ्फसिल थाना में प्राथमिकी दर्ज

Vehicle Fraud के मामले में पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में शंकराचार्य मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के दो पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। दोनों पर ग्राहकों को वाहन दिलाने का भरोसा देकर उनसे रकम लेने और कंपनी के साथ वित्तीय अनियमितता करने का आरोप है। कंपनी के प्रतिनिधि महेश कुमार चौहान की लिखित शिकायत पर चाईबासा मुफ्फसिल थाना में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल कथित ठगी की कुल राशि का स्पष्ट ब्योरा सामने नहीं आया है।

Vehicle Fraud मामले में विदेश राय और अभिषेक कुमार सिंह नामजद

प्राथमिकी में कंपनी के पूर्व सेल्स मैनेजर विदेश राय और सेल्स पर्सन अभिषेक कुमार सिंह को आरोपित बनाया गया है। विदेश राय के पिता का नाम विनय राय है। वह पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के जामियारा के निवासी बताए गए हैं। वहीं, अभिषेक कुमार सिंह के पिता का नाम मोहन कुमार सिंह है। उनका पता आदित्यपुर, सरायकेला-खरसावां बताया गया है। कंपनी की ओर से दोनों के खिलाफ ग्राहकों से रकम लेने और वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी करने की शिकायत की गई है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

ग्राहकों को वाहन उपलब्ध कराने का दिया जाता था भरोसा

कंपनी की ओर से गुरुवार को दी गई जानकारी के मुताबिक, दोनों कर्मचारी शंकराचार्य मोटर्स में काम करने के दौरान ग्राहकों से संपर्क करते थे। आरोप है कि वे ग्राहकों को वाहन उपलब्ध कराने का भरोसा देते थे। इसी आधार पर उनसे पैसे लिए जाते थे। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस प्रक्रिया में कंपनी के वित्तीय हितों को नुकसान पहुंचाया गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कितने ग्राहकों से रकम ली गई और उनमें से कितने लोगों को वाहन नहीं मिला। पुलिस इन पहलुओं की जांच कर रही है।

14 मार्च 2026 को कंपनी को मिली थी गड़बड़ी की जानकारी

शिकायत के अनुसार, कंपनी को कथित वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी 14 मार्च 2026 को मिली थी। इसके बाद प्रबंधन ने आंतरिक जांच शुरू की। वित्तीय लेनदेन का सत्यापन कराया गया। कंपनी का दावा है कि जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद मामले से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की जानकारी जुटाई गई। हालांकि, कथित गड़बड़ी में कुल कितनी रकम शामिल है, इसका विस्तृत हिसाब फिलहाल सार्वजनिक नहीं हुआ है। जांच के बाद ही आर्थिक नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सत्यापन के बाद दोनों कर्मचारियों से संपर्क में आई परेशानी

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि आंतरिक जांच और वित्तीय लेनदेन के सत्यापन के बाद दोनों कर्मचारियों ने कंपनी आना बंद कर दिया। कंपनी की ओर से उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन इसमें परेशानी हुई। शिकायत में उनके मोबाइल फोन बंद होने का भी उल्लेख है। कंपनी ने इस स्थिति को जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के साथ पुलिस के समक्ष रखा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित लेनदेन कैसे हुआ और इसमें दोनों की क्या भूमिका रही।

रकम वापस मांग रहे ग्राहक, कंपनी के सामने भी परेशानी

शिकायत के मुताबिक, जिन ग्राहकों ने वाहन दिलाने के नाम पर रकम दिए जाने की बात कही है, वे अब अपनी राशि वापस मांग रहे हैं। इससे कंपनी के सामने भी परेशानी उत्पन्न होने का दावा किया गया है। ग्राहकों की संख्या और प्रत्येक ग्राहक से कथित तौर पर ली गई रकम की जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी सामने आना बाकी है कि किसी ग्राहक को आंशिक राशि वापस की गई या नहीं। पुलिस जांच में संबंधित ग्राहकों के बयान और भुगतान से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

बीएनएस की धाराओं में दर्ज हुई प्राथमिकी

कंपनी के प्रतिनिधि महेश कुमार चौहान ने संबंधित दस्तावेजों के साथ मुफ्फसिल थाना में लिखित शिकायत दी थी। इसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 316(4), 318(4) और 61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन धाराओं के तहत दर्ज मामले में पुलिस आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी। प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना नहीं है। मामले में संबंधित पक्षों की भूमिका और तथ्यों की पुष्टि जांच के दौरान की जाएगी।

पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी कथित ठगी की पूरी तस्वीर

चाईबासा में सामने आए इस मामले में पुलिस के सामने कथित वित्तीय अनियमितताओं, ग्राहकों से लिए गए पैसों और कंपनी को हुए नुकसान से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की चुनौती है। जांच के दौरान भुगतान के रिकॉर्ड, कंपनी के दस्तावेज और ग्राहकों से मिली जानकारी अहम हो सकती है। फिलहाल कथित ठगी की कुल राशि और प्रभावित ग्राहकों की संख्या का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

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