20 लाख रुपये की पहली किस्त लेते वकील पकड़ा गया, दिल्ली के वकील और उनके रिश्तेदार पर भी कार्रवाई
CBI Bribery मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) के उप निदेशक हरिश कुमार तंवर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि DHFL घोटाले की जांच में मदद करने के बदले एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। सीबीआई के अनुसार, इस कथित रिश्वत की मांग एक वकील के माध्यम से की जा रही थी। जांच एजेंसी ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद जाल बिछाया। इसी दौरान वकील को 20 लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए पकड़ा गया। मामले में दिल्ली के वकील भरत शर्मा और उनके रिश्तेदार आर्यन शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है।
CBI Bribery: मामले में हरिश कुमार तंवर भी गिरफ्तार
गिरफ्तार SFIO अधिकारी हरिश कुमार तंवर भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 2017 बैच के अधिकारी हैं। वह चेन्नई में SFIO के उप निदेशक के पद पर तैनात बताए गए हैं। इस मामले में दिल्ली के वकील भरत शर्मा और उनके रिश्तेदार आर्यन शर्मा की गिरफ्तारी भी हुई है। सीबीआई को आशंका है कि कथित रिश्वत की मांग और उसे लेने की प्रक्रिया में तीनों की भूमिका रही। हालांकि, सभी आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल सीबीआई मामले से जुड़े साक्ष्यों को जुटाने में लगी है।
CBI Bribery: DHFL घोटाले की जांच में मदद के बदले रिश्वत मांगने का आरोप
मामला दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) से जुड़े वित्तीय घोटाले की जांच से संबंधित है। शिकायत के अनुसार, जांच में शिकायतकर्ता को कथित तौर पर राहत दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि इस रकम का भुगतान सीधे अधिकारी को करने के बजाय वकील के माध्यम से किया जाना था। सीबीआई को इस संबंध में लिखित शिकायत मिली थी। इसके बाद एजेंसी ने आरोपों की पड़ताल की और शिकायत का सत्यापन किया। सत्यापन के आधार पर मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की गई।
पहली किस्त के रूप में 20 लाख रुपये देने पर बनी सहमति
शिकायत के सत्यापन के दौरान रिश्वत की रकम के भुगतान को लेकर बातचीत हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने एक करोड़ रुपये की कथित मांग को किस्तों में पूरा करने की पेशकश की थी। इस प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के बाद सीबीआई ने कार्रवाई की योजना बनाई। जांच एजेंसी ने जाल बिछाया और वकील को कथित तौर पर 20 लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामले में हरिश कुमार तंवर और आर्यन शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया। सीबीआई की कार्रवाई का उद्देश्य कथित रिश्वत मांगने और लेने के पूरे नेटवर्क की जांच करना है।
अधिकारी और वकील के ठिकानों पर तलाशी
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने सरकारी अधिकारी और वकील से जुड़े परिसरों पर तलाशी भी ली। रिपोर्ट के अनुसार, तलाशी के दौरान मामले से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। इससे कथित लेनदेन, आरोपितों के बीच संपर्क और रिश्वत की मांग से जुड़े तथ्यों को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बरामद सामग्री के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं में मामला
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा 7ए के तहत केस दर्ज किया है। ये प्रावधान कथित आपराधिक साजिश और रिश्वत से जुड़े आरोपों के संदर्भ में लगाए गए हैं। मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की भूमिका और कथित लेनदेन की पूरी कड़ी का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
DHFL मामले में आगे की जांच पर टिकी नजर
DHFL घोटाले से जुड़ी जांच में कथित रिश्वतखोरी का यह मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि वित्तीय धोखाधड़ी की जांच के दौरान ही शिकायतकर्ता को मदद पहुंचाने के नाम पर बड़ी रकम मांगी गई। सीबीआई की कार्रवाई के बाद अब यह पता लगाना अहम होगा कि कथित रिश्वत की मांग किस स्तर पर हुई और इसमें किसकी क्या भूमिका थी। फिलहाल गिरफ्तारी और तलाशी के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। आरोपितों को दोषी ठहराने का फैसला अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।
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