Tribal Dispute: पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के गुड़ाबांदा प्रखंड (Gudabanda Block) स्थित बेनागड़िया गांव में जाहेर स्थान पर कथित तौर पर गाय की बलि दिए जाने के आरोप को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने मामले की जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर अंचल अधिकारी, उपायुक्त, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, घाटशिला के देश परगना और बालिजुड़ी पंचायत की मुखिया को लिखित आवेदन सौंपा है।
Tribal Dispute: ग्रामीणों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान गैर-पारंपरिक अथवा चुनावी ग्राम प्रधान बालिराम हेम्ब्रम ने अपने सहयोगियों सिंगराई हेम्ब्रम और कारान टुडू के साथ मिलकर गांव के पवित्र जाहेर स्थान पर गाय की बलि दी। ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना से गांव के अलग-अलग समूहों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र या प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। बेनागड़िया, गुड़ाबांदा प्रखंड की बालिजुड़ी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला गांव है। उपलब्ध गांव संबंधी रिकॉर्ड के अनुसार यह पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित है और यहां अनुसूचित जनजाति आबादी की हिस्सेदारी काफी अधिक है।
Tribal Dispute: जाहेर स्थान को लेकर बढ़ी नाराजगी
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में जाहेर स्थान को संथाल समुदाय का पवित्र धार्मिक स्थल बताते हुए वहां कथित बलि की घटना पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि गांव की पारंपरिक व्यवस्था में जाहेर स्थान का विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व है। इसी कारण वहां होने वाली गतिविधियों को लेकर ग्रामीण संवेदनशील हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व पारंपरिक ग्राम प्रधान शशि हेम्ब्रम ने गाय और भैंस की बलि का विरोध किया था। इसके बाद उन्हें ग्राम प्रधान के पद से हटाकर बालिराम हेम्ब्रम को गैर-पारंपरिक चुनावी ग्राम प्रधान बनाया गया। ग्रामीणों ने जाहेर स्थान में मौजूद धार्मिक महत्व वाले पेड़ को बेचने को लेकर भी विवाद होने का आरोप लगाया है।
Village Dispute: पारंपरिक व्यवस्था बहाल करने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से वर्तमान ग्राम प्रधान बालिराम हेम्ब्रम को पद से हटाने और उनका मानदेय बंद करने की मांग की है। साथ ही पेसा अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए पारंपरिक ग्राम प्रधान शशि हेम्ब्रम को दोबारा ग्राम प्रधान नियुक्त करने की मांग भी रखी गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि विवाद केवल एक कथित घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव की पारंपरिक व्यवस्था और धार्मिक स्थल से जुड़े अधिकारों का भी मामला है। इसलिए प्रशासन को दोनों पक्षों की बात सुनकर स्थिति की जांच करनी चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे गांव में सामाजिक तनाव न बढ़े।
Administrative Action: शांति व्यवस्था की भी मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर शिकायत में लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने लाई जाए। साथ ही जब तक विवाद का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक गांव में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
आवेदन सौंपने के दौरान बालिराम हेम्ब्रम, शुकुंतला मुर्मू, फुलमंत्री टुडू, बाघराय मुर्मू, चातुर मुर्मू, शन्नो मुर्मू, श्रीमती मुर्मू, चेंदुआ माकन मुन्ना, लिलमनी मुर्मू, बंसा मुर्मू, सोनामनी मुर्मू, दलपते मुर्मू, अहानी मनी मुर्मू और सीता राम हेम्ब्रम सहित कई ग्रामीण मौजूद थे। फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई अंतिम निर्णय या आरोपों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर उठे इस विवाद में आगे की प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होगी।
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