spot_img
spot_img
Homeउद्योगTata Power Collaboration: स्वच्छ ऊर्जा में नया प्रयोग, IIT बॉम्बे संग करार

Related Posts

Tata Power Collaboration: स्वच्छ ऊर्जा में नया प्रयोग, IIT बॉम्बे संग करार

Tata Power Collaboration: देश में स्वच्छ ऊर्जा की रफ्तार को तेज करने के लिए टाटा पावर (Tata Power) और आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) ने हाथ मिलाया है। दोनों ने अगली पीढ़ी की ऊर्जा तकनीक और ग्रीन एनर्जी समाधान विकसित करने के लिए रणनीतिक साझेदारी की है।

Tata Power Collaboration: लैब से बाजार तक तेज होगा सफर

इस साझेदारी के तहत मास्टर रिसर्च एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए हैं। समझौते का मकसद लैब में बन रही तकनीकों को बड़े पैमाने पर उपयोग लायक और व्यावसायिक समाधान में बदलना है। अक्सर कई अच्छी तकनीकें लैब तक ही सीमित रह जाती हैं, इस करार से उस दूरी को खत्म किया जाएगा। मंगलवार को टाटा स्टील की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार टाटा पावर के सीईओ और एमडी डॉ. प्रवीर सिन्हा और आईआईटी बॉम्बे के डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. श्रीकृष्ण वी. कुलकर्णी ने एग्रीमेंट पर साइन किए। इस दौरान आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे भी मौजूद रहे।

इसे भी पढ़ें : Jharkhand CGL Protest: नौकरी बचाने सड़क पर उतरे दो हजार कर्मी

Tata Power Collaboration: इन क्षेत्रों में होगा संयुक्त रिसर्च

समझौते के तहत दोनों संस्थान कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इसमें स्मार्ट ग्रिड, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा भंडारण यानी एनर्जी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, साइबर सुरक्षा, पावर सिस्टम में एआई का इस्तेमाल, डिजिटल ग्रिड तकनीक, कार्बन कैप्चर और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। टाटा पावर की इंडस्ट्री की समझ और आईआईटी बॉम्बे की रिसर्च की ताकत को जोड़कर ऐसी तकनीक बनाई जाएगी जो सीधे उद्योग और आम लोगों के काम आ सके। यह साझेदारी मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी बड़ा कदम मानी जा रही है।

इसे भी पढ़ें : Jharkhand Student Agitation: सरकार झुकी, जीत आधी-अधूरी : चंपाई

देश को मिलेगा सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा मॉडल

डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा कि यह सहयोग भारत के लिए अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था बनाने में मदद करेगा। हमारा लक्ष्य है कि देश को ऐसी तकनीक मिले जो सस्ती भी हो और पर्यावरण के अनुकूल भी। वहीं प्रो. शिरीष केदारे ने कहा कि इस साझेदारी से स्वदेशी तकनीकों के विकास को बल मिलेगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और डीकार्बोनाइजेशन यानी कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को गति मिलेगी। झारखंड जैसे औद्योगिक राज्यों में जहां ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है, वहां इस तरह की तकनीक भविष्य में बड़ी भूमिका निभाएगी।

इसे भी पढ़ें : Jharkhand Student Protest: रांची में अनशन टूटा, छात्रों में जश्न

जमशेदपुर और झारखंड के लिए क्यों अहम है करार

टाटा पावर का जमशेदपुर और पूर्वी सिंहभूम से पुराना नाता रहा है। टाटा स्टील के जरिए दी गई जानकारी में कहा गया है कि इस रिसर्च का फायदा सीधे औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा। स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज जैसी तकनीक से फैक्ट्रियों में बिजली की खपत कम होगी और सप्लाई ज्यादा स्थिर होगी। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर रिसर्च से आने वाले समय में ई-वाहनों के लिए बेहतर चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा। यह साझेदारी भारत को 2070 तक नेट जीरो के लक्ष्य तक पहुंचाने में भी मदद करेगी।

इसे भी पढ़ें : Jharkhand Rain Havoc: चाईबासा में भारी बारिश, बाढ़ जैसे हालात, पुल बहा

Latest Posts