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FRA Act: संताल परगना में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ माकपा का आंदोलन तेज

  • मई के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय घेराव का ऐलान

Ranchi: संताल परगना के जनजातीय इलाकों में कथित भूमि अधिग्रहण और संवैधानिक अधिकारों के हनन के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने बड़ा आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। पार्टी ने मई के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

भूमि अधिग्रहण को लेकर गंभीर आरोप

माकपा का आरोप है कि संताल परगना के आदिवासी क्षेत्रों में जिला प्रशासन, जिला खनन पदाधिकारी (एमडीओ) और स्थानीय दलालों की मिलीभगत से वनाधिकार अधिनियम (FRA), पेसा कानून और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि ग्राम सभाओं की अनुमति के बिना सर्वेक्षण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चलाई जा रही है, जो पूरी तरह असंवैधानिक है।

ग्रामीणों से मिलकर लिया गया फीडबैक

बुधवार को माकपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों से बातचीत कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे, जिन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह ग्राम सभा की सर्वोच्चता को नजरअंदाज कर रहा है और ग्रामीणों पर दबाव बनाया जा रहा है।

लंबित वनाधिकार दावों पर उठे सवाल

माकपा ने यह भी आरोप लगाया कि जिले में वनाधिकार से जुड़े कई आवेदन वर्षों से लंबित हैं। पार्टी का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बावजूद पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) के मामलों का निपटारा किए बिना विस्थापन की तैयारी की जा रही है, जो पूरी तरह गैरकानूनी है।

ग्राम सभा को लेकर ग्रामीणों का अल्टीमेटम

प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्थानीय प्रधानों को 10 दिनों के भीतर ग्राम सभा बुलाने का अल्टीमेटम दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि:

  • वन अधिकार समिति का गठन किया जाए
  • नए दावों का पंजीकरण सुनिश्चित हो
  • सभी प्रक्रियाएं ग्राम सभा की सहमति से हों

साथ ही ग्राम सभा की कार्यवाही को राज्यपाल, राष्ट्रपति और उच्च न्यायालय को साक्ष्य के रूप में भेजने की तैयारी भी की जा रही है।

निर्णायक आंदोलन की चेतावनी

माकपा ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई और जनजातीय अधिकारों की रक्षा नहीं की, तो मई के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय के सामने हजारों ग्रामीणों के साथ बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। पार्टी ने इसे आदिवासी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की निर्णायक लड़ाई बताया है।

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