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Roopi Soren Funeral: रुपी सोरेन का नेमरा में अंतिम संस्कार, बेटे हेमंत सोरेन ने दी मुखाग्नि-Video

नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, बाबूलाल मरांडी समेत पक्ष-विपक्ष के कई दिग्गज नेता पहुंचे

Roopi Soren Funeral: रूपी सोरेन पंचतत्व में विलीन हो गईं। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव नेमरा में हुआ। बेटे हेमंत सोरेन ने उन्हें मुखाग्नि दी। मुखाग्नि देते समय मुख्यमंत्री बेहद भावुक दिखे। उस क्षण वहां सन्नाटा पसर गया। सोरेन परिवार के सदस्यों की आंखें भर आईं। रिश्तेदार और ग्रामीण अपने आंसू नहीं रोक सके। अंतिम विदाई का यह पल बेहद मार्मिक था। पूरा इलाका शोक की लहर में डूब गया। हर किसी का दिल भारी हो गया था।

Roopi Soren Funeral
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Roopi Soren Funeral: पैतृक गांव नेमरा में उमड़ा जनसैलाब

सुबह से ही नेमरा में लोग जुटने लगे थे। हर गली और चौराहे पर उदासी छाई थी। पार्थिव देह पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। ग्रामीणों ने अपनी प्रिय अभिभावक को नमन किया। महिलाएं और बुजुर्ग फफक कर रोने लगे। पूरे गांव में शोक की छाया रही। किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। लोग अपने सुख-दुख की साथी को याद कर रहे थे। उनका सरल स्वभाव हर किसी को भाता था। ग्रामीण उनके निधन से बेहद आहत दिखे। उन्होंने नम आंखों से अंतिम जोहार कहा।

Roopi Soren Funeral
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Roopi Soren Funeral: पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता पहुंचे

नेमरा में श्रद्धांजलि देने कई प्रमुख नेता पहुंचे। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी वहां उपस्थित हुए। उन्होंने शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। विधायक मथुरा महतो भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। शिकारीपाड़ा विधायक राजेश कश्यप ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। विधायक शिल्पा नेहा तिर्की भी गांव पहुंचीं। राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने शोक व्यक्त किया। पूर्व विधायक ममता देवी भी वहां मौजूद रहीं। जेएमएम और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पहुंचे। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक जुटे। सभी दलों के नेताओं ने दुख साझा किया। विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग भी पहुंचे। सबने मिलकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

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प्रशासनिक अधिकारियों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था

अंतिम संस्कार को लेकर कड़े सुरक्षा इंतजाम रहे। पुलिस बल के जवान हर जगह तैनात थे। प्रशासनिक पदाधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रखे थे। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर डटे रहे। नेमरा जाने वाले मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई थी। वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया। भारी भीड़ के बीच व्यवस्था चाक-चौबंद रही। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने की तैयारी थी। पूरी अंतिम यात्रा शांति और मर्यादा से संपन्न हुई। प्रशासन ने परिजनों का पूरा सहयोग किया।

संघर्षों की प्रतीक थीं रूपी सोरेन, नम आंखों से विदाई

रूपी सोरेन झारखंड आंदोलन की मजबूत स्तंभ थीं। उन्होंने अपने जीवन में कड़ा संघर्ष देखा। अलग राज्य की लड़ाई में उनका त्याग अमर रहेगा। वे सदैव गरीबों के सुख-दुख में खड़ी रहीं। गांव के लोग उनके वात्सल्य को याद कर रहे हैं। उनका जाना राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है। अब उनकी पावन स्मृतियां ही शेष रह गई हैं। लोगों ने अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें विदा किया। उनका त्याग और समर्पण सदैव याद किया जाएगा। पूरा झारखंड आज शोकमग्न है।

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