- महिला अधिवक्ता से दुर्व्यवहार मामले में ट्रायल कोर्ट की सजा बरकरार, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत का फैसला
Ranchi: में उच्च न्यायालय के अधिवक्ता महेश तिवारी की अपील पर मंगलवार को सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रधान न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत में इस मामले की विस्तृत बहस हुई। सुनवाई के दौरान महेश तिवारी के पक्षकार अधिवक्ता ने विभिन्न मामलों का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट से मिली सजा पर रोक लगाने की मांग की। वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता अभय मिश्रा ने इसका विरोध करते हुए सजा पर रोक नहीं लगाने के लिए अपनी दलीलें पेश कीं।
अदालत का फैसला: फिलहाल सजा पर रोक नहीं
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फिलहाल महेश तिवारी को दी गई सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तिथि निर्धारित की है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2012 में हाईकोर्ट परिसर में हुए विवाद से जुड़ा है। आरोप है कि अधिवक्ता महेश तिवारी ने महिला अधिवक्ता ऋतु कुमार के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया था।
इस मामले में:
- रांची सिविल कोर्ट के न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने महेश तिवारी को दोषी ठहराया
- उन्हें दो वर्ष की सजा सुनाई गई
- साथ ही 19,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया
वहीं, महेश तिवारी द्वारा दर्ज कराए गए काउंटर केस में साक्ष्य के अभाव में ऋतु कुमार को बरी कर दिया गया।
कानूनी प्रक्रिया और दर्ज मामले
इस घटना को लेकर डोरंडा थाना में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थीं:
- कांड संख्या 191/2012 (महिला अधिवक्ता की शिकायत)
- कांड संख्या 192/2012 (महेश तिवारी की ओर से दर्ज काउंटर केस)
अदालत अब अपील पर आगे की सुनवाई में सभी तथ्यों और साक्ष्यों की पुनः समीक्षा करेगी।
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